मीडिया की मंडी में इस घटना ने तो मेरी जिंदगी ही बदल दी

अपनी पत्रकारिता की अवस्मरणीय जानकारियां अनवरत अपने एफबी वॉल पर लिखते हुए वरिष्ठ पत्रकार धीरज कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी…….”अदालत कटघरे में”।

बड़बड़िया न्यूज चैनलों की अब कड़ी निगरानी करेगी दिल्ली सरकार

मीडिया पर आम आदमी पार्टी को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाने के चंद रोज बाद अब अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने तय किया है कि वह तमाम न्यूज चैनलों के कॉन्टेंट पर कड़ी निगाह रखेगी । दिल्ली सरकार ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे टीवी चैनलों पर ब्रॉडकास्ट होने वाले कॉन्टेंट को मॉनिटर करें। इस संबंध में डायरेक्टरेट ऑफ इन्फर्मेशन ऐंड पब्लिसिटी (डीआईपी) के अधिकारियों को जारी आदेश में कहा गया है कि वे सुबह 9 बजे से रात 11 बजे के बीच टीवी चैनलों पर प्रसारित कॉन्टेंट को मॉनिटर करें।

मीडिया पर अरविंद-अखिलेश के तेवर एक, रोज-रोज की बेढंगी चाल से दोनो तल्ख, भरोसा टूटा

 

नई दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गत दिवस दिल्ली सचिवालय में हुई एक साझा बैठक में जमीन विवाद सुलझाने पर आपसी विमर्श किया। बैठक में दिल्ली-नोएडा बॉर्डर के पास स्थित जमीन के बेहतर उपयोग पर चर्चा हुई। करीब एक घंटे चली बैठक में पहले मुख्यमंत्री, मंत्री, अधिकारियों के बीच संयुक्त बैठक हुई और फिर अधिकारियों को अलग करके चर्चा की गई। बैठक के साथ ही एक सबसे महत्वपूर्ण सूचना पूरे देश में गूंज गई, मीडिया हाउसों के मनमानेपन पर अखिलेश यादव की टिप्पणी। गौरतल है कि इन दिनो मुख्यमंत्री केजरीवाल भी मीडिया के जादू मंतर से काफी क्षुब्ध हैं। इस मुद्दे पर दोनो सीएम के तेवर एक से माने जा रहे हैं। 

क्या कॉर्पोरेट मीडिया का काम सिर्फ बड़े राजनीतिक दलों का एजेंडा सेट करना है

इस समय चौबीस घंटे में तेईस घंटे मीडिया देश के नाम पर सिर्फ दिल्ली की ख़बरें दिखा रहा है। ये अपने को राष्ट्रीय चैनल कहते हैं। इसमें कहाँ है उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल, मणिपुर, आंध्र, उड़ीसा की ख़बरें? क्या दिल्ली ही इनका देश और राष्ट्र है। क्या सिर्फ दिल्ली को देखने के लिए और मीडिया की सेट बकवास को सुनने के लिए हम दो सौ से सात सौ रूपये तक का भुगतान केबल और डिश को करते हैं। जो फेज़ मीडिया का चल रहा है, यह ऐसे ही चलता रहे, यही हम सब के हित में है। ऐसे अपने ही किये धरे से ये खुद ही जनता में अपना भरोसा खो देंगे।

ऐसे आरोपों के दौर में मीडिया की न बचाव-मुद्रा अच्छी, न हमलवार : ओम थानवी

नेताओं की गाली पड़ते ही मीडिया गोलबंद अर्थात एक हो जाता है। मनमोहन सिंह ने मीडिया पर कपट का आरोप लगाया था, मोदी ने बाजारू कहा, केजरीवाल ने सुपारीदार, वीके सिंह और अन्य अनेक नेता भी भद्दी उपमाएं इस्तेमाल कर चुके हैं। भद्दे प्रयोगों का निश्चय ही प्रतिकार होना चाहिए।

चूरन न्यूज़ बेच रहे ‘टीवी मीडिया’ ने तो दिमाग़ का दही कर डाला

‘TV मीडिया’ जिसने दिल दिमाग़ का दही कर दिया है और ‘मीडिया’ नाम पर जूतों का हार चढ़वा दिया है दरअसल मीडिया है भी और नहीं भी है पर इसने ज़बरन “प्रिंट” से सरेंडर करा लिया है ।

बज्र अनपढ़ हैं ये मीडिया के माइकवीर, मैंने सिर पीट लिया

कुछ साल पहले मैं एक फैक्‍ट फाइंडिंग में दीमापुर गया था। वहां से लौटा, तो अंग्रेज़ी की एक महिला पत्रकार ने मुझसे संबंधित खबर के बारे में फोन पर बात की। उसने पूछा- आप कहां गए थे? मैंने कहा- नगालैंड। उसका अगला सवाल था- इज़ इट अब्रॉड? मैंने सिर पीट लिया। 

बरखा सिंह उर्फ़ बरखा रानी… बाक़ी तो जो है, सो हइयै है !

बरखा सिंह उर्फ़ बरखा रानी ( जब वे मंचीय कवि थीं तब का उपनाम) आरके पुरम क्षेत्र से विधान सभा चुनावों में इस बार अपनी ज़मानत गँवा चुकी हैं पर वे दिल्ली राज्य महिला आयोग की प्रमुख हैं और दीपक चौरसिया के चैनल पर “आप” प्रकरणों में कांग्रेस/महिला आयोग की ओर से पैनलिस्ट होती हैं ।

केजरीवाल बोले – पत्रकारों के सैलरी रिकार्ड की करा रहा पड़ताल, अब हो मीडिया का भी पब्लिक ट्रायल

दिल्ली : एक न्यूज वेबसाइट की लॉन्चिंग के मौके पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहा कि झूठी खबरों का पर्दाफाश करने के लिए मीडिया का पब्लिक ट्रायल होना चाहिए। हमारी  सरकार मीडिया संस्थानों में टैक्स रेकॉर्ड और सैलरी से जुड़ी डिटेल्स की पड़ताल कर रही है। लेबर इंस्पेक्टर न्यूज संस्थानों का दौरा कर रहे हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार के प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा से जब यह पूछा गया है कि क्या आप प्रशासन ने इस आइडिया पर आगे बढ़ना शुरू किया है, तो उनका कहना था कि अब तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

Letter To Indian Media : Sunita Shakya

To Indian media,

I would like to thank from the bottom of my heart for the help your country has provided at this time of crisis in my country, Nepal. All the Nepalese in and outside of the country are thankful to your country. However, me being a Nepali outside from my motherland, when saw your news and news reports, my heart cried and hurt more than those destruction caused by 7.9 Richter magnitude of earthquake. Like all the medical personnel are taught and trained for potential disasters in future, as a reporter, I hope there is some kind of training on how to report different events. Your media and media personnel are acting like they are shooting some kind of family serials. If your media person can reach to the places where the relief supplies have not reached, at this time of crisis can’t they take a first-aid kit or some food supplies with them as well?

नेपाल के भूकंप पर भारतीय मीडिया का मृत्यु-प्रहसन, सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया

नेपाल के भूकंप पर ख़बरों को भारतीय टेलीविज़न चैनलों ने जिस तरह पेश किया है, उससे सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया है। रवीश कुमार लिखते हैं – ”नेपाल में ट्वीटर पर #gohomeindianmedia ट्रेंड तो कर ही रहा था और उसकी प्रतिक्रिया में भारत में भी ट्रेंड करने लगा है। मुझे इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी मगर कुछ तो था जो असहज कर रहा था। टीवी कम देखने की आदत के कारण मीडिया के कवरेज पर टिप्पणी करना तो ठीक नहीं रहेगा, लेकिन जितना भी देखा उससे यही लगा कि कई ख़बरों में सूचना देने की जगह प्रोपेगैंडा ज्यादा हो रहा है। ऐसा लग रहा था कि भूकंप भारत में आया है और वहां जो कुछ हो रहा है वो सिर्फ भारत ही कर रहा है। कई लोग यह सवाल करते थक गए कि भारत में जहां आया है वहां भारत नहीं है। उन जगहों की उन मंत्रियों के हैंडल पर फोटो ट्वीट नहीं है जो नेपाल से लौटने वाले हर जहाज़ की तस्वीर को रीट्विट कर रहे थे। फिर भी ट्वीटर के इस ट्रेंड को लेकर उत्साहित होने से पहले वही गलती नहीं करनी चाहिए जो मीडिया के कुछ हिस्से से हो गई है।”

मालदार, असरदार और सरकार का वफादार रेवाड़ी का मीडिया

मीडिया वही, घोटाले वही। कुछ नहीं बदला। बदला तो सिर्फ हरियाणा के रेवाड़ी जिले का मीडिया है, जिसे अचानक कथित घोटाले उजागर करने का जैसे ठेका ले लिया है। ये कथित घोटाले हैं सरकारी जमीन और रेवाड़ी नगर परिषद से जुड़े हुए। मीडिया इन्हें खुद उजागर नहीं कर रहा है। भाजपा के जिला अध्यक्ष सतीश खोला बधाई के पात्र हैं, जो इस काम में लीड कर रहे हैं। इसके पीछे मकसद क्या है यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा, लेकिन यह साफ नजर आ रहा है कि मीडिया उनकी ‘नेकनियती’ में खुलकर साथ दे रहा है। 

Freedom of Media and Privileges of Parliament

New Delhi : A privilege motion has been moved by 60 MPs of 14 major parties in Rajya Sabha in a matter related to RSTV. This extraordinary step is bound to raise a debate on freedom of media and privileges of Parliament. We, in RSTV, have practiced the highest ethical and professional standards of unbiased journalism and find ourselves morally suited to address the debate. I thank you for patronizing the channel and being our partner in the endeavour.

पीएम का दावा : मीडिया और सरकार से ज्‍यादा मजबूत मेरा सूचना तंत्र

नई दिल्ली : संसद भवन के अपने कक्ष में मध्य प्रदेश के पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि उनका अपना सूचना तंत्र मीडिया और सरकार के सूचनातंत्र से ज्यादा मजबूत है। वह चार दशक तक संघ प्रचारक के रूप में देशभर में घूमे हैं। उस दैरान हजारों लोग उनके सीधे संपर्क में रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को भी मेरे ट्वीट से भूकंप की जानकारी मिली। 

मीडिया की मंडी में हमारे लिए अब जयपुर के वे दिन सपने जैसे

ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में……हर महीने दस दिन की बुकिंग मिलती थी….उससे एक मुश्त कमरे का किराया और भोजन सहित छोटा-मोटा खर्च निकल जाता था,ये बहुत बड़ा सहारा था।साथ ही यह उम्मीद भी, कि कभी मौका लगा तो दूरदर्शन में स्थायी हो जाएंगें।तब किसी ने मार्गदर्शन नहीं दिया था,कि समाचार विभाग में सरकार कभी एडिटर या सब एडिटर की पोस्ट नहीं निकालेगी।खैर ये तो लंबे समय तक धक्के खा कर खुद ही समझना पड़ा।समाचार संपादक एम आर सिंघवी ने मुझमें विश्वास जताया और न्यूज रूम में हर तरह के असाइनमेंट करने का मौका दिया।

मीडिया बहस में नेट निष्पक्षता, अलग-अलग चार्ज मंजूर नहीं

नेट निष्पक्षता का प्रश्न आजकल मीडिया की गंभीर चर्चाओं में है। फेसबुक, ट्विटर आदि पर लगातार टिप्पणियां पोस्ट हो रही हैं। पिछले दिनो दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) के तत्वधान में आयोजित परिचर्चा में भी यह मुद्दा छाया रहा। आज भी सोशल माध्यमों, लेखों, टिप्पणियों, वार्ताओं में ये मुद्दा छाया हुआ है। अब तो वरिष्ठ पत्रकार तरुण विजय ने भी 28 अप्रैल को राज्यसभा में नेट न्यूट्रैलिटी का मुद्दा उठा दिया। 

भारतीय मीडिया ने नेपाल में उतारी रिपोर्टरों की फौज, वे भी वहां के गंभीर हालात से हो रहे दो-चार

भारतीय न्यूज चैनलों और अखबारों ने बड़ी संख्या में अपने रिपोर्टरों की फौज नेपाल के मोरचे पर तैनात कर दी है। उन्हें प्रतिकूल हालात में प्राकृतिक आपदा से जूझते हुए सूचनाएं लगातार अपडेट करनी पड़ रही हैं। बीती आधी रात बाद तक भारतीय पत्रकार नेपाल की पल पल की स्थितियों पर नजर रखे रहे। वायु सेवाएं असामान्य होने, होटल-बाजार बंद होने, संचार और बिजली सेवाएं ध्वस्त होने का खामियाजा नेपाल में खबरें बटोर रहे पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है. इस प्राकृतिक आपात काल को इस नजरिए से भी सोशल मीडिया देख रहा है कि भारतीय किसानों पर प्रकृति की मार, गजेंद्र सिंह आत्महत्याकांड और आम आदमी पार्टी की करतूतों, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जैसे ज्वलंत मसलों पर मीडिया गतिविधियां आश्चर्यजनक ढंग से अचानक तटस्थ हो गई हैं।  

मीडिया रिपोर्ट्स पर यक़ीन करें तो किसानों के मुद्दे पर हार रही मोदी सरकार

विदर्भ हो या दौसा, तेलंगाना हो या बुंदेलखंड, अगर भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स पर यक़ीन किया जाए तो फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले किसान गजेंद्र सिंह को ‘आपदा पीड़ित’ किसान कहना मुश्किल है. राजस्थान स्थित उनके गाँव का दौरा करने वाले पत्रकारों के अनुसार उनके परिवार के पास 10 एकड़ ज़मीन है. उनका परिवार गेहूँ, आँवला और टीक की खेती करता है. भारत में 65 प्रतिशत किसानों के पास एक एकड़ या उससे कम ज़मीन है. वहीं, राजस्थान में 70 प्रतिशत खेती योग्य ज़मीन ऐसे किसानों के पास है जो मझोले या बड़े किसान हैं यानी जिनके पास 15 एकड़ या उससे ज़्यादा खेती की ज़मीन है.

चौंकाता है सोशल मीडिया में सामुदायिक राजनीति पर रुझानों का यह ताजा निष्कर्ष

मास कम्यूनिकेशन के कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया में सामुदायिक आधार पर राजनीतिक रुझानों पर एक अध्ययन में निम्न निष्कर्ष निकाले हैं । ये ताज़े निष्कर्ष हैं मार्च /अप्रैल 2015 के । सोशल मीडिया सर्वे ग्रुप के रिसर्च पर आधारित ये निष्कर्ष इस प्रकार हैं- 

सामंती, मध्यवर्गीय टुच्चई से ओतप्रोत विशिष्ट पत्रकारों को काबिलियत का गुमान

पत्रकार : अच्छा ख़ासा वक़्त (कोई एक दशक) vernacular media में 1984-1993 तक अपना भी गुज़रा । फिर व्यावसायिक ज़िम्मेदारियों ने मैदान से बाहर कर दिया और जब लौटने लायक हालात हुए तो तकनीक ने outdated कर दिया । अब हमें replace कर चुकी पीढ़ी का युग है और हम संस्मरण दर्ज करने की उम्र/स्थिति में । फ़ेसबुक ने पुन: इस जलवागार में साँस लेने की जगह दे दी ।

अपनी भूमिका और दिशा से भटका भारतीय मीडिया

संसद के बजट सत्र में बीमा, खनन और कोल से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए. देश के विकास से जुड़े तीनों महत्वपूर्ण कानूनों के बारे में इस देश की जनता की समझ क्या है? यह विचारणीय पहलू है कि जिस कोयला घोटाले को लेकर राष्ट्रीय मीडिया ने पूरे 24 महीने तक लगातार कवरेज कर तबकी यूपीए सरकार को जमीन पर लाने का काम किया, उसी मीडिया ने नयी सरकार की नयी कोयला नीति पर 24 सेकेण्ड की भी खबर प्राइम टाईम में दिखाना उचित नहीं समझा. हाँ मनमोहन सिंह को इस घोटाले में जारी समन पर जरूर विशेष बुलेटिन 24 घंटे खबरिया चैनलों ने प्रसारित किए।

माकपा का पेज थ्री मार्क्सवाद : येचुरी के महासचिव बनते ही मीडिया में आशा का संचार

उन लोगों को संगठन में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है जो माकपा के अपराधीकरण के खिलाफ बोल रहे थे। का. अच्युतानंदन उनमें से एक हैं। पहले यही गति स्व. नृपेन चक्रवर्ती की हुई और दोनों मौकों पर प्रकाश कारात की बड़ी भूमिका रही है। सीताराम येचुरी के माकपा महासचिव बनते ही मीडिया में आशा का संचार दिख रहा है। उनको कोई भिन्न खबर मिली है। हमने बहुत पहले लिखा था, फिर लिख रहे हैं, सीताराम के महासचिव बनने से माकपा सुधरने नहीं जा रही। लेकिन एक काम जरूर होगा मीडिया में माकपा जरुर नजर आएगी, क्योंकि सीता का मीडिया जनसंपर्क हमेशा से अच्छा रहा है। लेकिन माकपा को मीडिया में नहीं आम जनता में काम करना है।

इस कयामती, घनघोर नस्ली कारपोरेट समय में मीडिया

जब लघु पत्रिका आंदोलन का जलवा था सत्तर के दशक में, जब मथुरा से सव्यसाची उत्तरार्द्ध के साथ साथ जन जागरण के लिए सिलसिलेवार ढंग से जनता का साहित्य- सूचनाओं और जानकारियों का साहित्य रच रहे थे, उत्कट साहित्यिक महत्वाकांक्षाओं और अभिव्यक्ति के दहकते हुए ज्वालामुखी के मुहाने पर था हमारा कैशोर्य। तभी आनंद स्वरूप वर्मा वैकल्पिक मीडिया के बारे में सोचने लगे थे। भूमिगत आग अब/ फोड़ देगी जमीन/ जलकर खाक होगी/ लुटेरों की यह/ नकली दुनिया। तब कामरेड कारत, येचुरी और सुनीत चोपड़ा भी जवान थे। जेएनयू परिसर लाल था। हालांकि वहां न कभी बुरांश खिले और न ही पलाश। न वहां कोई दावानल महका हो कभी। गोरख पांडे को वहां खुदकशी करनी पड़ी और डीपीटी जैसों का कायाकल्प होता रहा।

मजीठिया वेतनमान : मीडिया कर्मियों पर फैसला आने से पहले कई सवाल केजरीवाल पर

अब तो लाखो मीडिया कर्मियों के भविष्य ही नहीं, केजरीवाल के एक और इम्तिहान का भी दिन होगा 28 अप्रैल । जिस दिन से दिल्ली के मुख्यमंत्री ने प्रिंट मीडिया के पत्रकारों और कर्मचारियों के वेतन को लेकर गठित जीआर मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त करने की घोषणा की है, मन में कई तरह के प्रश्न और संदेह आ-जा रहे हैं। मसलन, क्या अरविंद केजरीवाल सचमुच अपनी घोषणाओं पर सख्ती से अमल कर भारतीय प्रिंट मीडिया नामक कारपोरेट हाथियों से शत्रुता मोल ले सकते हैं, या इसके पीछे भी कोई बड़ा खेल है, जो हाल-फिलहाल पकड़ में नहीं आना है?

अरे सुब्रत राय और भगोड़ों, लोगों की हाय तुम्‍हें जीने नहीं देगी !

”सरऊ ! खूब किहौ परधानी, सरऊ ! खूब किहौ परधानी, खूब किहो मनमानी सरऊ, तबै गई परधानी सरऊ, खूब किहो परधानी सरऊ। हतनेन दिन मा गाल चुचुकिगै, तब कटत रही बिरयानी, सरऊ ! खूब किहौ परधानी, सरऊ ! खूब किहौ परधानी”। हमारे एक मित्र हैं डॉक्‍टर सुरेश कुमार पाण्‍डेय। मूलत: गोंडा के तरबगंज बाजार में रहने वाले डॉक्‍टर पाण्‍डेय जब दो साल पहले रिटायर हुए तो वकालत को अपना लिया। हैं मूलत: भौतिकी के छात्र, लेकिन लोक-संस्‍कृति और खास कर चुटीली कविताएं लिखना, याद करना और किसी मुफीद मौके पर उन्‍हें दाग देना उनकी खासियत और शगल भी है।

फेकू मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर हुआ वायरल…

पीएम नरेंद्र मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा हुआ है कि सीमेंट की एक बोरी 120 रुपये में मिल रही है. एबीपी न्यूज द्वारा चलाई गई ऐसी खबर का स्क्रीनशाट लगाकर लोग लिख रहे हैं कि अब मोदी जी ही बता दें कि वो दुकान कहां है जहां पर इतने सस्ते रेट पर सीमेंट की बोरी मिल रही है.

जागरण की नई चाल, मीडिया कर्मियों में फूट डालने के लिए फर्जी यूनियन का गठन

एक कहावत है, लतियाए रहो, लतियाए रहो। फिर भी हम किसी से कम नहीं। यही हाल है दैनिक जागरण प्रबंधन का। उसे जीत हार से कोई मतलब नहीं है। उसका एक सूत्रीय कार्यक्रम है-नीचता दिखाना। फोर्थ पिलर को कुछ ऐसे दस्‍तावेज मिले हैं, जो दैनिक जागरण प्रबंधन की नीचता के पुख्‍ता प्रमाण हैं। समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नीच लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए क्‍यों तैयार हो गए। वह एक ऐसे पत्रकार को क्‍यों तवज्‍जो देते हैं, जिस पर दैनिक जागरण की एक कर्मचारी के यौन शोषण का आरोप है। वह ऐसे मालिकों के साथ क्‍यों फोटो खिंचवाते हैं, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की लगातार अवमानना कर रहे हैं और हजारों कर्मचारियों ने अवमानना की याचिका दायर कर उन्‍हें आरोपी बनाया है। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट समेत हजारों कर्मचारियों के साथ खेल करने वाले मीडिया औघड़ों के साथ खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के बीच अपनी साख गिराई है।

चौथे खंभे में दीमक लग गया है, मीडिया धंधेबाज और मुस्लिम विरोधी : आजम खां

बदायूं : उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य और नगर विकास मंत्री आजम खां ने कहा है कि मीडिया धंधेबाज है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में दीमक लग गया है। मीडिया देश को बदनाम कर रहा है। धंधा चलाने को ये किसी भी हद तक जा सकता है। मीडिया न देश की इज्जत करता है, न रिश्तों की। मीडिया को जितनी आजादी भारत में है, उतनी दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं है। मीडिया की झूठी खबरों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हुई है। एक गलत खबर ने भारत को बलात्कारियों को देश बना दिया। 

आज का मीडिया पत्रकारिता के मानदंडों पर खरा नहीं

वर्तमान संदर्भ में जब हम मीडिया की भूमिका को खोजने निकलते हैं, तो किसी तरह के नकारात्मक या सकारात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने में खासी मेहनत करनी पड़ती है, न तो मीडिया की तारीफ करते बनता है और न ही बेवजह मीडिया की आलोचना ही की जा सकती है। यह बहुत ही दुविधा वाली परिस्थिति है। मीडिया की भूमिका बहुत बेहतर चाहे न हो, पर एकदम नकारा भी नहीं है।

रामपुर में ‘नए नवाब’ का इशारा मिलते ही ‘चरस वाले बाबा’ नाम से कुख्यात एक सीनियर पुलिस अफसर जेल भेज देता है…

(आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर)


: एक आईपीएस अफसर की जुबानी, रामपुर में एक नेता के दहशत, आतंक और अत्याचार की कहानी : मैं और नूतन दो दिन के लिए रामपुर गए. वजह थी यह जानकारी कि वहां करीब 80 वाल्मीकि परिवार, जो लगभग 60 वर्षों से घर बना कर रह रहे थे, को जिला प्रशासन द्वारा अचानक उजाड़े जाने की बात कही जा रही है. हम 11 अप्रैल की शाम लगभग 5 बजे रामपुर पहुंचे और 12 को लगभग 12 बजे तक वहां रहे. इस दौरान हमने मौके को भलीभांति देखा और देखते ही यह बात समझ में आ गयी कि वाल्मीकि बस्ती के लोगों की बात पूरी तरह जायज़ है. कई दशकों से ये लोग पक्के मकान बना कर रह रहे हैं, पूरे के पूरे परिवार. उनके वोटर आईडी हैं, सभी सरकारी दस्तावेज़ हैं, नगर पालिका ने मकान नंबर दिए हैं.

मीडिया में माफी और मार !​

सचमुच मीडिया से माननीयों का रिश्ता भी बड़ा अजीब है। मीडिया को ले हमारे  माननीयों का रवैया न  निगलते बने, न उगलते वाली है। सुबह किसी सेमिनार में प्रेस की स्वतंत्रता पर लंबा व्याख्यान दिया और शाम को उस मीडिया पर बरसने लगे। कभी फटकार तो कभी पुचकार। 

इन मीडिया वालो की तो हथियारों के दलालों से भी साठगांठ : वी के

नई दिल्ली : विदेश राज्यमंत्री वी. के. सिंह ने मीडिया पर एक और प्रहार करते हुए कहा है कि कुछ मीडिया कर्मियों की भ्रष्ट हथियार डीलरों से साठगांठ है। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनो में वीके सिंह ने मीडिया को ‘प्रेस्टिच्यूड’ कहा था। 

मीडिया कौन सा दूध का धुला है, बाजारू या बिकाऊ कहने पर आपत्ति जताना ठीक नहीं : ओम थानवी

वीके सिंह कहते हैं, देश का दस फीसद मीडिया ‘बाजारू’ है। लगता है वे लिहाज करने लगे वरना, मेरा खयाल है, यह प्रतिशत कहीं ज्यादा ही होगा। 

जनरल साहब कारपोरेट मीडिया के मालिकों पर भी तो कुछ सचबयानी करिए !!

जनरल साहब आपने अगर मीडिया को #presstitude कहा तो अपने हिसाब से ठीक ही कहा होगा. हो सकता है इस बार खरीद बिक्री में कुछ कमी रह गयी होगी और सौदा नहीं पटा होगा जिसकी परिणति तल्खबयानी में हुई. 

मीडिया से जुड़ो, फिर मजे करोगे, जैसे कि ‘वो’

आप पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, जाहिर सी बात है कि जीवन यापन की चिन्ता से ग्रस्त होंगे। यह तो अच्छा है कि अभी तक अकेले हैं, कहीं आप शादी-शुदा होते तो कुछ और बात होती। पढ़े-लिखे हैं और चिन्ताग्रस्त हैं, ऐसे में रातों को नींद नहीं आती होगी, आप एक काम करिए, कलम-कागज लेकर बैठ जाइए, बस कुछ ही दिनों में आप को लिखने की आदत पड़ जाएगी। 

मंत्री के थानाक्षेत्र में नाबालिक बच्ची से रेप पर मीडिया खामोश, कुकर्मी ने अंग में तेल डाल कर आग लगाई

बस्तर : जिले के थाना भानपुरी से लगे मावलीगुडा गाँव के स्कूल में पढ़ने वाली अवयस्क आदिवासी छात्रा के साथ एक युवक द्वारा पैशाचिक बलात्कार करने और बाद में बच्ची के गुप्तांग में मिट्टी का तेल डाल कर आग लगाने जैसा लोमहर्षक कृत्य किये जाने की खबर है। इस पर मीडिया खामोश बताया गया है। 

क्रांतिकारी बनने वाले बड़े (अमीर) पत्रकारों की मजीठिया पर ये चुप्पी कर रही अप्रिय इशारे

“Indian media is politically free but imprisoned by profit” पी. साईंनाथ भारतीय मीडिया को इस तरह परिभाषित करते हैं. बहुत वक्त नहीं लगा भारतीय मीडिया को जब वह जन सरोकारों को कुचलकर कारपोरेट की गोद जाकर बैठ गई. हाल की घटनाएं तो और भी चिंताजनक हैं. 

वीके सिंह ने फिर साधा मीडिया पर निशाना, काटजू भी बोल पड़े- मीडिया का बड़ा तबका प्रेस्टीट्यूट है!!

मीडिया को वेश्या कहने वाले विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने अपने बयान के बचाव में फिर मीडिया पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है कि मेरे साधारण से बयान का मतलब अगर मीडिया ने ये निकाला कि मेरा यमन जाना पाक दिवस कार्यक्रम में जाने से कम रोमांचकारी है तो ऐसी विकृत मानसिकता से भगवान ही बचाए. वी के सिंह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया को चिट्ठी भी लिखी है जिसमें मीडिया के एक हिस्से को कोसा है.

प्रेसटीट्यूट्स (वेश्या) कहने पर मीडिया को गुस्सा आया, बीईए ने मोदी से गुहार लगाई

नई दिल्ली : मीडिया को ‘प्रेसटीट्यूट्स’ बताने वाले विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह की एक मीडिया संगठन ने निंदा की है। साथ ही विपक्ष ने उन्हें बर्खास्‍त करने की मांग कर डाली है। ट्वीट पर ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन के महासचिव एनके सिंह ने कहा, ”यदि मंत्री इस प्रकार के बयान देते रहे तो लोगों को सरकार से विश्वास उठ जाएगा। यह न केवल मीडिया का अपमान है, बल्कि इससे लोकतंत्र को भी चोट पहुंचेगी। मैं उम्मीद करूंगा कि पीएम नरेंद्र मोदी इस मामले पर ध्यान देंगे। इससे सरकार की छवि ही खराब हो रही है।”

वर्धा विश्वविद्यालय में ‘आध्यात्मिक मीडिया’ पर तीन दिवसीय संगोष्ठी 28, 29, 30 जुलाई को

वर्धा (महाराष्ट्र) : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) के संचार एव मीडिया अध्ययन केंद्र की ओर से (आईसीएसएसआर, नई दिल्ली द्वारा) 28, 29, 30 जुलाई, 2015 को तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। गोष्ठी का विषय बड़ा अनोखा सा है – ‘आध्यात्मिकता, मीडिया और सामाजिक बदलाव’। गोष्ठी के सूचना-पटल पर लिखा गया है – ‘पत्रकारों को मीडिया एथिक्स पर ध्यान देना जरूरी है। आध्यात्मिकता का आशय मूल्य आधारित पत्रकारिता से है।’

लैंगिक अल्पसंख्यकों पर ‘छिछोरे समाचार’ घातक, ‘संचार प्रसार माध्यम मार्गदर्शिका’ में मीडिया गाइड लाइन जारी

दिल्ली : ‘हमसफर’ ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक राव कवि के मुताबिक प्रसार माध्यमों में, जो लैंगिक अल्पसंख्यकों का सनसनीखेज, अवैज्ञानिक एवं एकतरफा चित्र प्रस्तुत किया जाता है, उसमें बदलाव जरूरी है। एलजीबीटी समाज के बारे में ‘छिछोरे समाचार’ पेश किए जाते हैं। इसी उद्देश्य से अपने सामाजिक अस्तित्व के लिए संघर्षरत एलजीबीटी (समलैंगिक लेस्बियन, गे, बायसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) समुदाय की ओर से संचार मीडिया गाइड (प्रसार माध्यम मार्गदर्शिका) जारी की गई है। इसकी लेखिका अल्पना डांगे हैं और हिंदी में इसका अनुवाद विवेक पाटिल ने किया है। इंडिया एच.आई.वी. / एड्स अलायंस ने इनोवेशन फंड के तहत हमसफर ट्रस्ट के इस प्रकल्प को आर्थिक सहायता प्रदान की है। 

आम आदमी का हथियार है सोशल मीडिया

दिल्ली : ‘नया मीडिया मंच’ सातवें समारोह को संबोधित करते हुए प्रवक्ता डॉट कॉम के संपादक संजीव सिन्हा ने कहा कि इंटरनेट राजनीतिक परिवर्तन और लोकतांत्रीकरण की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। सोशल मीडिया ने जनअभिव्‍यक्ति को सहज-सरल बना दिया है। सवाल खड़ा करने और असहमति व्‍यक्‍त करने का यह अच्‍छा मंच है। अब युवा आंदोलन के तेवर बदले हैं। जिंदाबाद-मुर्दाबाद करने का तौर-तरीका बदला है। देश के नाम से लेकर राष्‍ट्रगीत, राष्‍ट्रभाषा, राष्‍ट्रीयता सब पर विवाद है। युवाओं को आगे आकर सब पर सोचना होगा।

बिहार में श्रमजीवी पत्रकारों का खून पीकर मुस्टंड हुआ मीडिया

बिहार के ईमानदार और जुझारू वरिष्ठ पत्रकार रामानंद सिंह रोशन कारपोरेट मीडिया के राज में ग्रामीण पत्रकारों की गुलाम-दशा देखकर हैरत में हैं। मजीठिया मामले पर तो कोई बात करते ही वह विक्षुब्ध होकर मालिकानों पर बरस पड़ते हैं। उन्हें उन पत्रकारों पर भी गुस्सा आता है, जो इतने गंभीर मामले पर खुल कर सामने आने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। 

सतना में इन्द्रधनुष की मीडिया कार्यशाला 6 अप्रैल को

सतना : मिशन इन्द्रधनुष की ओर से 6 अप्रैल को आज दोपहर 12 बजे से जिला प्रशिक्षण केन्द्र सतना में मीडिया वर्कशाप का आयोजन किया गया है। जिले के प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया प्रतिनिधियों से मीडिया वर्कशाप में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का आग्रह किया गया है। 

जयपुर में मीडिया सम्मेलन का समापन : सोशल मीडिया पर खबर लिखवाना भी सिखाएं पत्रकारिता संस्थान

जयपुर : न्यू मीडिया हमारे जैसे पत्रकारों के लिए चुनौती है, पत्रकारिता संस्थानों को ट्यूटर और फेसबुक पर खबर लिखवाना भी सिखाना चाहिए। चाहे ओसामा बिन लादेन के मरने की खबर हो, चाहे जापान में आई भारी सुनामी की खबर हो, ये सभी खबरें सबसे पहले सोशल मीडिया पर ही ब्रेक हुई थी। सोशल मीडिया …

आगरा में कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर बरसीं पुलिस और सपाइयों की लाठियां

आगरा (उ.प्र.) : यहां कमलानगर में रह रहे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग चेयरमैन के पुतला दहन और प्रदर्शन की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर भी सपा और पुलिस वालों ने लाठियां भांजीं। एक राउंड गोली भी चली। पुलिस ने कई पत्रकारों की पिटाई कर दी। लात-घूंसे मारे। गला पकड़ लिया। चेहरों पर नाखून मार दिए। इसके विरोध में भाजपाइयों ने पुलिस लाइन में गिरफ्तारी दी। पुलिस ने दो छात्रनेताओं को गिरफ्तार कर लिया है। पत्रकारों के भी खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 

चार साल मीडिया में काम कर थोड़ा बहुत मीडिया को समझने भी लगी हूँ

आपको भी घरवालों ने कभी बचपन में किसी रिश्तेदार या पड़ोसी से मिलाकर कहा होगा … ” देखा … कितना होशियार है / हैं , इनकी तरह बनो…समझे । हर घर की बड़ी ही सामान्य सी बात है ये … चाहे आप बड़े शहर में रहते हों , छोटे कस्बे में रहते हों या फिर गाँव में।बचपन से ही बच्चों के आगे एक रोल मॉडल रख दिया जाता है और उन्हें हर बार नसीहत में कहा जाता है …” उनको देखा है कितना नाम है उनका , कितना कमाते हैं / कमाती हैं , कितनी अच्छी जॉब है ! ….फलाना ढिमका..

मीडिया गुरुओं के सम्मेलन में दूसरे दिन पत्रकारिता की भाषा और भूमिका पर पढ़े गए शोधपत्र

जयपुर : मीडिया शिक्षकों के महाकुंभ के दूसरे दिन मणिपाल विवि में देश भर से आए मीडिया शिक्षक और रिसर्च स्कोलरों ने शोध पत्रों का वाचन किया। अधिकांश शोध पत्र पारंपरिक और सोशल मीडिया के सामाजिक प्रभाव, पत्रकारिता की भाषा, विज्ञापन, सिनेमा, न्यू मीडिया, वेब पत्रकारिता और संचार माध्यमों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहे। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता देश भर से आये मीडिया शिक्षकों ने की। प्रतिभागियों ने 180 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए और बदलते दौर में मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया।

जयपुर में मीडिया महाकुंभ शुरू, पहले दिन गूंजी तीसरे प्रेस आयोग के गठन की मांग

जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में गुरुवार को मीडिया शिक्षकों का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया। इसमें बीस राज्यों के ढाई सौ से अधिक मीडिया गुरू समाज में सकारात्मक बदलाव और इसमें मीडिया की भूमिका पर विचार विमर्श करने के लिए जमा हुए हैं। सम्मेलन का उदघाटन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रो. बी के कुठियाला ने किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं, वरन प्रमुख स्तंभ है। प्रो. कुठियाला ने तीसरे प्रेस आयोग के गठन की मांग की। ब्रॉडकास्टर्स एडिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव एन.के. सिंह ने मीडिया के कामकाज में सरकारी दखल को गैर जरूरी करार दिया।

मंचासीन प्रो. सच्चिदानंद जोशी, एनबीटी चेयरमैन बल्देव भाई शर्मा, वीसी प्रो. बीके कुठियाला, वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह, उमेश उपाध्याय, संजीव भानावत आदि 

मीडिया का बाजारीकरण लोकतंत्र के लिए खतरनाक : प्रो.नामवर सिंह

नई दिल्ली : हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक प्रो. नामवर सिंह ने कहा है कि मीडिया का बाजारीकरण किया जाना देश और समाज दोनों के लिए खतरे का संकेत है। यह लोकतंत्र के एक स्तंभ के रूप में जाना जाता है। इसका बाजारीकरण होता है तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा। 

म.प्र. हाई कोर्ट के जज पर महाभियोग, मीडिया ने चुप्पी साधी

भोपाल/दिल्ली : राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने 58 सांसदों की याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के जज एसके गंगेले के खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है. यह पहला मौका है जब यौन उत्पीड़न के मामले में किसी जज को हटाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है. अलबत्ता पहले भ्रष्टाचार के मामलों में ऐसा किया जा चुका है. बेसिर पैर की ख़बरों पर जमीन-आसमान एक करने वाले भोपाल के मीडिया की इस खबर पर चुप्पी हैरान कर रही है.

मीडिया मालिकों ने बंधुआ मजदूर बना रखा है पत्रकारों को

देश में आज सबसे ज्यादा अगर शोषित है तो वह पत्रकार है। चाहे पत्रकार अखबार से जुड़ा हो या टेलिविजन से । पता नहीं कितने लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने खून पसीने से अखबारी संस्थानों को सींच कर बड़ा किया लेकिन मुसीबत में वे उसे कोई मदद नहीं देते। अखबार -न्यूज़ चैनल के मालिकन जब चाहें, किसी को काम पर रख लेते हैं , जब चाहें उन्हें काम से निकाल देते हैं । इनके यहाँ इन न्यूज़ चैनल या अखबारों को टीआरपी दिलाने वाले, संवाददाता, रिपोर्टर या स्ट्रिंगर की कोई औकात नहीं। पत्रकार इनके लिए मात्र बंधुआ मजदूर से अधिक की हैसियत नहीं रखते। 

पाक मीडिया ने उछाला अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का इंटरव्यू

नई दिल्ली : पाकिस्तानी मीडिया ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की उस टिप्पणी को उछाल दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान की इमेज दुश्मन देश के रूप में बनाने के लिए भारत में ब्रेन वॉशिंग हो रही है। भारत में तो अक्सर पाक कलाकारों का विरोध होता है। नसीरुद्दीन ने ये बातें एंटरटेनमेंट वेबसाइट ‘बॉलिवुड हंगामा’ को दिए एक इंटरव्यू में कही थीं।

मीडिया गुरुओं के सम्मेलन में प्रेस पर सार्थक बहस जरूरी

दो से चार अप्रैल तक जयपुर में हो रहे मीडिया शिक्षकों के महा सम्मेलन को सार्थक बनाने के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के संचार केंद्र अध्यक्ष संजीव भानावत को इन विंदुओं पर भी ध्यान देना चाहिए और मीडिया के भविष्य और भविष्य की मीडिया, मीडिया शिक्षा का स्तर, पत्रकारिता के नाम पर व्यवसाय, पत्रकारिता के नाम काला पीला काम समेत मीडिया में आ रहे छात्रों के स्तर पर भी गंभीर चर्चा कराते हुए इसे सार्थक बनाना चाहिए।

जयपुर में चौदह राज्यों के ढाई सौ से अधिक मीडिया शिक्षकों का सम्मेलन 2 से 4 अप्रैल तक

जयपुर (राजस्थान) : राजस्थान विश्व विद्यालय के मानविकी सभागार में दो अप्रैल से देश भर के जाने-माने मीडिया शिक्षक जुटेंगे। वे ‘समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय अखिल भारतीय मीडिया शिक्षक सम्मेलन में शिरकत करेंगे। 

मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी की सलमान की याचिका कोर्ट ने ठुकराई, प्रेस को भी दिया निर्देश

मुंबई : वर्ष 2002 के हिट-एंड-रन मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिनेता सलमान खान की अपील खारिज करते हुए कहा कि बयान दर्ज किए जाते समय अदालत में मीडिया की मौजूदगी रहेगी। अदालत ने हालांकि मीडिया को यह हिदायत भी दी कि वह इस मामले से संबंधित खबरों में केवल तथ्य दिखाए, मगर मामले के गुण-दोषों पर चर्चा करने से बचे।

मीडिया हाउस की याचिका पर अदाकारा श्रुति हासन को अदालती नोटिस

मुबई। मीडिया और एंटरटेनमेंट हाउस ‘पिक्चर हाउस मीडिया’ ने कमल हासन की अदाकारा बेटी श्रुति हासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मजीठिया : मीडिया कर्मियों का हक मारने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मालिकों के नए-नए हथकंडे

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की तीस याचिकाएं पर सुनवाई की गई । ये सभी नए मामले थे। इन मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को आभास हो गया है कि मालिक असंगठित कर्मचारियों का हक मारने के लिए रोज ‘रोज नए -नए हथकंडे अपना रहे हैं।

देश के सत्तर प्रतिशत गांवों की खबर मीडिया से नदारद : उर्मिलेश

दिल्ली : मोतीलाल नेहरू कालेज में मीडिया पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में आईआईएमसी के प्रोफेसर डॉ.आनंद प्रधान ने कहा कि कारपोरेट मीडिया और पूंजी में गठजोड़ हो जाने से आज भारत में पारंपरिक मीडिया की विश्वसनीयता संदिग्ध हो चली है। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि भारतीय मीडिया अब गरीब और कमजोर लोगों को उनका हक दिलाने के प्रति जवाबदेह नहीं रहा है। इसका चरित्र मेट्रो केंद्रित हो गया है। कमर वहीद नकवी ने कहा कि मीडिया को उत्पीड़ितों का पक्षधर होना चाहिए। 

मीडिया में भविष्य से बड़ी हैं वर्तमान की चुनौतियां

दिल्ली : कोंस्टीट्यूशन क्लब (सभागार) में गत दिनो वरिष्ठ पत्रकार स्व. आलोक तोमर की चौथी पुण्यतिथि पर आयोजित सेमिनार में देश के दिग्गज पत्रकारों ने हिस्सा लिया और आलोक तोमर को याद किया। सेमिनार का नाम “यादों में आलोक” तथा मुख्य विषय “मीडिया की भविष्य की चुनौतियां” था, जिस पर आम से लेकर खास तक ने अपने विचार रखे और आने वाली परिस्थितियों पर मीडिया जगत को आगाह किया। इस दौरान किसी ने मीडिया को कोसा तो किसी ने सराहा। मिलीजुली प्रतिक्रियाओं के बीच सेमीनार की शुरुआत हुयी।

‘मीडिया विमर्श’ के गुजराती पत्रकारिता विशेषांक का विमोचन

रायपुर : भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ प्रदेश के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अपने निवास पर जनसंचार के सरोकारों पर केन्द्रित पत्रिका “मीडिया विमर्श” के गुजराती पत्रकारिता विशेषांक का विमोचन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर, पत्रिका के प्रबंध सम्पादक प्रभात मिश्र, संपादक मंडल की सदस्य डॉ सुभद्रा राठौर, वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी सहित युवा पत्रकार हेमंत पाणिग्राही, बिकास कुमार शर्मा, मनीष शर्मा एवं रोहित साहू उपस्थित थे।

बड़ा फैसला : सोशल मीडिया पोस्‍ट पर अब तुरंत जेल नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66ए को खत्म किया

 नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66ए को खत्म कर दिया है। अब सोशल मीडिया पर कुछ भी लिख देने पर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आईटी ऐक्ट के प्रावधानों में से एक 66 ए को निरस्त कर दिया। यह धारा वेब पर अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति देती थी। जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस आर एफ नरीमन की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ए से लोगों की जानकारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार साफ तौर पर प्रभावित होता है। कोर्ट ने प्रावधान को अस्पष्ट बताते हुए कहा, ‘किसी एक व्यक्ति के लिए जो बात अपमानजनक हो सकती है, वह दूसरे के लिए नहीं भी हो सकती है।’ सर्वोच्च अदालत ने केंद्र के उस आश्वासन पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। बेंच ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती रहती हैं, लेकिन धारा 66 ए हमेशा के लिए बनी रहेगी।

मीडिया और सरकार दोनो कॉरपोरेट के कब्जे में, अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा

गोरखपुर : 10वें गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल में प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति राय ने देश में अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरों की ओर इशारा करते हुए सरकारी सेंसरशिप को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने महात्मा गांधी संबंधी अपने बयान के समर्थन में डॉ.अंबेडकर की किताब के कुछ अंश पढ़े। उन्होंने कहा कि गांधी हिंदुस्तान के पहले कॉरपोरेट एनजीओ थे। 

धारा 66-ए : सोशल मीडिया की आजादी पर आज फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने के मामले में लगाई जाने वाली आईटी एक्ट की धारा 66-ए का भविष्य (आज) मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े इस विवादास्‍पद कानून के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद इस कानून के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।

एस्सार-मीडिया सांठ-गांठ मामले पर केंद्र और सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली: एस्सार कंपनी के ई-मेल लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीआई और एस्सार को नोटिस जारी करते हुए छह हफ़्ते में जवाब मांगा है। एस्सार मामले में दायर जनहित याचिका के खुलासे ने कई दिग्गज पत्रकारों को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था। एस्सार की सुविधाएं भोगने को लेकर कई वरिष्ठ पत्रकार संदेह के घेरे में आ गए थे।

संजय गुप्‍ता प्रकरण : क्या मीडिया मालिकों का चुनावी कदाचार अपराध नहीं?

राजनैतिक पार्टियाें और अधिकारियों के खिलाफ कानून का डंडा फटकारने वाला चुनाव आयोग जब मीडिया के खिलाफ कार्रवाई करने का समय आता है तो बंगले झांकने लगता है। पेड न्‍यूज के मामले में तो गजब तर्क का सहारा ले रहा है।

डिजिटल मीडिया की चुनौती महज ख़याली नहीं

पिछले एक दशक से पारंपरिक मीडिया को एक नए मीडिया से चुनौती मिल रही है जिसका डिलीवरी मैकेनिज़्म अलग है। जो इंटरनेट के जरिए पाठक और दर्शक तक पहुँचता है और प्रिंट तथा टेलीविजन से ज्यादा सक्षम है, खास तौर पर अपनी इंटरएक्टिविटी की वजह से। यह है नया मीडिया या डिजिटल मीडिया।

इस्लामोफोबिया से भारतीय मीडिया को बचाने की जरूरत

संवाद के अवसर हों, तो बातें निकलती हैं और दूर तलक जाती हैं। मुस्लिम समाज की बात हो तो हम काफी संकोच और पूर्वग्रहों से घिर ही जाते हैं। हैदराबाद स्थित मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूर्निवर्सिटी में पिछली 17 और 18 मार्च को ‘मुस्लिम, मीडिया और लोकतंत्र’ विषय पर हुए सेमीनार के लिए हमें इस संस्था का आभारी होना चाहिए कि उसने इस बहाने न सिर्फ सोचने के लिए नए विषय दिए, बल्कि यह अहसास भी कराया कि भारत-पाकिस्तान की सामूहिक इच्छाएं शांति से जीने और साथ रहने की हैं।

मीडियाकर्मी और उनके पत्नी-बेटे पर रॉड से हमला, गंभीर घायल, अस्पताल में भर्ती

जबलपुर (म.प्र.) : बेटे का मोबाइल चोरी जाने की शिकायत लेकर सपरिवार पहुंचे मीडिया कर्मी पर स्कूल प्रबंधन ने हमला कर दिया। रॉड से हुए वार से मीड़िया कर्मी, उसकी पत्नी तथा बेटा बुरी तरह घायल हो गए। घायल मीडिया कर्मी को इलाज के लिए विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। 

दूरदर्शन ने जीता मीडिया क्रिकेट का खिताब

लखनऊ : केडी सिंह बाबू स्टेडियम पर हिमांशु शुक्ला मेमोरियल मीडिया ट्वेंटी. 20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में सुधीर अवस्थी (69) और सी एस आजाद (नाबाद 45) की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत दूरदर्शन स्पोर्टस क्लब ने टाइम्स ऑफ इंडिया को 8 विकेट से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया।

मीडिया की तरह राजनीति को भी सर्कस बनाना चाहते हैं आशुतोष

आशुतोष ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने मीडिया को माफ़ी मांगने की सलाह दी है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है – “Will media apologise?ASIF KHAN claimed a sting on Sanjay Singh.He has none.It ran as headline/every channel has his interview.#MediaFooled”.

दूसरा ट्वीट कर आशुतोष फिर लिखते हैं- 

भारतीय मीडिया की परिपक्वता पर प्रश्नचिह्न

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रमुख हो या विचाराधीन मामलों में मीडिया का संयम, भारत में फटाफट खबर ब्रेक करने की अंधाधुंध होड़ ने प्रेस की परिपक्वता पर सवालिया निशान लगा दिया है. मीडिया की खबरें न्यायाधीशों के फैसलों पर असर डालती हैं. निर्भया मामले में विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण पर रोक हटाने की अपील पर सुनवाई में जज ने कहा कि खबरों से दबाव बनता है और फैसलों का रुख भी बदल जाता है. 

सोशल मीडिया पर कॉरपोरेट दिग्गजों में पंगेबाजी

नई दिल्‍ली। सोशल मीडिया कॉरपोरेट दिग्गजों के बीच छींटाकशी और आरोप-प्रत्‍यारोपों का अखाड़ा बनता जा रहा है। इन दिनों ऐसा ही एक मामला रियल एस्‍टेट पोर्टल के संस्‍थापकों में से एक और सीईओ राहुल यादव और अमेरिकी वेंचर कैपिटल फर्म सिक्‍वाया के इंडिया हेड शैलेंद्र जे. सिंह के बीच तूल पकड़ रहा है।

‘मीडिया समाचार’ के संपादक पवन कुमार दुबे का निधन

मुंबई : ‘मीडिया समाचार’ के संपादक और इंडियन प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन कुमार दुबे का रविवार को देहांत हो गया। वे लगभग 50 वर्ष के थे। सुबह उनके सीने में दर्द उठा। पत्नी ने उन्हें कूपर अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। दोपहर में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसी दिन शाम को उनके परिजनों, पत्रकार मित्रों ने अंधेरी के पारसी वाड़ा श्मशान स्थल पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। उनके निधन से पत्रकार जगत में शोक की लहर फैल गई।

महिलाओं के मुद्दे पर मीडिया सनसनी न फैलाए – शंकर शरण

भोपाल : वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक शंकर शरण ने कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर मीडिया को जिम्मेदारी एवं जवाबदेहीपूर्ण रवैया अपनाने की आवश्यकता है। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के जो समाचार आज मीडिया में आ रहे हैं, वे सनसनी ज्यादा पैदा करते हैं। मीडिया को चाहिए कि वह सनसनी फैलाने के स्थान पर समाज में मूल्यों की स्थापना में सहयोग दे।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संविमर्श 

हिलाने वाले पत्रकारों की खुद की कुर्सियां क्यों हिलने लगी?

आमतौर पर खोजी पत्रकारिता नेताओं की कुर्सियाँ हिलाती है, लेकिन पिछले सप्ताह भारतीय समाचारपत्र, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में एक ख़बर छपने के बाद से अब पत्रकारों की कुर्सियाँ हिल रही हैं. ख़बर के मुताबिक़ कई पत्रकार एस्सार नाम की कंपनी के ख़र्चे पर टैक्सी जैसे फ़ायदे उठाते रहे हैं. आरोप मामूली हैं, लेकिन फिर भी अनैतिकता स्वीकारते हुए एक महिला और एक पुरुष संपादक ने अपने-अपने अखबारों से इस्तीफ़ा दे दिया है. एक टीवी समाचार चैनल में काम करने वाली एक और महिला पत्रकार को आंतरिक जाँच के चलते काम से हटा दिया गया है.

आइए आप और हम मिलकर इस बेलगाम मीडिया पर नकेल कसें, आप मीडिया संबंधी अपनी जानकारी-सूचनाएं साझा करें

: अखबारों-टीवी की विज्ञापन नीति और नैतिक मापदंडों के लिए मदद करें : बड़े नाम के किसी भी अखबार और पत्रिका को उठा लीजिए, मजीठिया वेतन बोर्ड आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पत्रकारों को वेतन देने में बहानेबाजी कर रहे अखबार मालिकों की माली हैसियत सामने आ जाएगी। लेकिन इनके अखबारों में विज्ञापनों की इतनी भरमार रहती है कि कभी तो उनमें खबरों को ढूंढना पड़ता है। लेखकों को दिए जा रहे पारिश्रमिकों की हालत यह है कि सिर्फ लेख लिखने के दम पर गुजारा करने की बात सोची नहीं जा सकती। हमारे देश में सिर्फ एक अखबार या पत्रिका में लेख या स्थायी स्तंभ लेखन के जरिए गुजारे की कल्पना करना, उसमें भी हिन्दी भाषा में, असंभव है।

दिल्ली की मीडिया इंडस्ट्री में हर रोज पत्रकार होने का दर्द भोग रहे हैं ढेर सारे नौजवान

: इंतजार का सिलसिला कब तक….  : दूर दराज के इलाकों से पत्रकार बनने का सपना लिए दिल्ली पहुंचने वाले नौजवान अपने दिल में बड़े अरमान लेकर आते हैं। उन्हे लगता है कि जैसे ही किसी न्यूज चैनल में एन्ट्री मिली तो उनका स्टार बनने का ख्वाब पूरा हो जाएगा. लेकिन जैसे ही पाला हकीकत की कठोर जमीन पर होता है वैसे ही सारे सपने धराशायी होते नजर आते हैं. अभी चंद रोज पहले मेरे पत्रकार मित्र से बात हुई तो पता चला कि उनके संस्थान में पिछले चार महीने से तनख्वाह नहीं दी गई है। हैरानी की बात ये है कि फिर भी लोग बिना किसी परेशानी के न केवल रोज दफ्तर आते हैं बल्कि अपने हिस्से का काम करते हैं।  जब बात सैलरी की होती है तो मिलता है केवल आश्वासन या फिर अगली तारीख.

मजीठिया वेज बोर्ड : यशवंत के साथ ना सही, पीछे तो खड़े होने की हिम्मत कीजिए

Rajendra Hada


मंगलवार, 20 जनवरी 2015 की शाम भड़ास देखा तो बड़ी निराशा हुई। सिर्फ 250 पत्रकार मजीठिया की लड़ाई लड़ने के लिए आगे आए? दुर्भाग्य से, जी हां दुर्भाग्य से, मैंने ऐसे दो प्रोफेशन चुने जो बुद्धिजीवियों के प्रतीक-स्तंभ के रूप में पहचाने माने जाने जाते हैं। वकालत और पत्रकारिता। दुर्भाग्य इसलिए कि दुनिया को अन्याय नहीं सहने की सलाह वकील और पत्रकार देते हैं और अन्याय के खिलाफ मुकदमे कर, नोटिस देकर, खबरें छापकर मुहिम चलाते हैं लेकिन अपने मामले में पूरी तरह ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं। अपनी निजी भलाई से जुडे़ कानूनों, व्यवस्थाओं के मामले में बुद्धिजीवियों के ये दो वर्ग लापरवाही और अपने ही साथियों पर अविश्वास जताते हैं। यह इनकी निम्नतम सोच का परिचय देने को काफी है।

किसान मर रहे हैं, मोदी सपने दिखाते जा रहे हैं, मीडिया के पास सत्ता की दलाली से फुर्सत नहीं

Deepak Singh :  प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बनने के बाद कौन सुध लेता हैं किसानों की? महाराष्ट्र में और केंद्र में दोनों जगह भाजपा की सरकार पर हालत जस के तस। यह हाल तब हैं जब नरेंद्र मोदी को किसानों का मसीहा बता कर प्रचार किया गया। आखिर क्यों नई सरकार जो दावा कर रही हैं की दुनिया में देश का डंका बज रहा हैं पर उस डंके की गूंज गाँव में बैठे और कर्ज के तले दबे गरीब और हताश किसान तक नहीं पहुँच पाई? क्यों यह किसान आत्महत्या करने से पहले अपनी राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं कर पाया की सरकार आगे आएगी और कुछ मदद करेगी?

मीडिया ने देश का मुंह काला कर दिया, माफी मांगे : आजम खां

लखनऊ के पत्रकार तो जैसे ढोलक हो गए हों. जब चाहे जो चाहे, बजा दे रहा है. कभी अखिलेश तो कभी आजम. ये जुगलबंदी जमकर मीडिया को फुटबाल की तरह यहां से वहां पीट दौड़ा रही है. आजम खान ने फिर मीडिया पर विष वमन किया है. यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने लखनऊ में मीडिया को जमकर लताड़ते हुए आरोप लगाया कि मीडिया ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर देश का मुंह काला कर दिया है, इसके लिए मीडिया देश से माफी मांगे.

श्वेता प्रसाद बसु का मीडिया के नाम खुला पत्र… क्या किसी संपादक में जवाब देने की हिम्मत है?

मीडिया वालों ने श्वेता प्रसाद बसु को वेश्या बता दिया लेकिन कोर्ट ने वेश्यावृत्ति के आरोपों को खारिज कर दिया. अब कहां गये मीडिया वाले. क्या वे श्वेता प्रसाद बसु की इज्जत से खेलने के आरोपी नहीं बन चुके हैं. श्वेता प्रसाद बसु ने खुद को बरी किए जाने के बाद मीडिया वालों को एक …

दृष्टिहीन युवा बेटे की मौत के बाद समीर जैन कुछ-कुछ आध्यात्मिक हो गए!

: लेकिन हरिद्वार छोड़ते ही वे एकदम हार्डकोर बिजनेसमैन बन जाते हैं : देश की सबसे ज्यादा कमाऊ मीडिया कंपनी है – बैनेट, कोलमैन एंड कंपनी। यह कंपनी टाइम्स ऑफ इंडिया, इकॉनोमिक्स टाइम्स, महाराष्ट्र टाइम्स, नवभारत टाइम्स, फेमिना, फिल्मफेयर जैसे अनेक प्रकाशनों के अलावा भी कई धंधों में है। टाइम्स ऑफ इंडिया जो काम करता है, उसी की नकल देश के दूसरे प्रमुख प्रकाशन समूह भी करते है। यह कंपनी अनेक भाषाओं के दैनिक अखबार छापना शुरू करती है, तो दूसरे अखबार मालिक भी नकल शुरू कर देते है। दैनिक भास्कर समूह, दैनिक जागरण समूह, अमर उजाला समूह, राजस्थान पत्रिका समूह जैसे ग्रुप ‘फॉलो द लीडर’ फॉर्मूले के तहत चलते है। टाइम्स ने मुंबई टाइम्स शुरू किया, भास्कर ने सिटी भास्कर चालू कर दिया।

बीएचयू कांड ने हम पत्रकारों को समझा दिया…. मीडिया निष्तेज तलवार हो चुकी है…

BHU हंगामे के दूसरे दिन हम तब अवाक रह गए जब जिला प्रशासन ने खवरनवीसों को आइना दिखाते हुए मेडिकल कालेज से आगे बढ़ने से ही रोक दिया… कुछ बायें दायें से रुइया हास्टल चौराहे तक पहुंचे लेकिन यहाँ पहले से ज्यादा की तादात में डटे वर्दीधारियों ने प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों के साथ आंय-बांय करते हुए इन्हें आगे नहीं जाने दिया… एक दो बार के असफल प्रयास के बाद अखबार के रिपोर्टर, फोटोग्राफर, चैनल के कैमरापर्सन, स्ट्रिंगर और रिपोर्टर समझौतावादी नीति के तहत वहीं अपनी-अपनी धूनी जमा ली… लेकिन कुछ खुरचालियो किस्म के खबरनवीसों ने धोबिया पछाड़ दाँव लगाते हुए पुलिसिया करतूत को कैमरे में कैद कर ही किया…

हां हम अयोग्य हैं, इसीलिए पत्रकार हैं क्योंकि….

”अयोग्य लोग ही इस पेशे में आते हैं, वे ही पत्रकार बनते हैं जो और कुछ बनने के योग्य नहीं होते..” आज स्थापित हो चुके एक बड़े पत्रकार से कभी किसी योग्य अधिकारी ने ऐसा ही कहा था… कहां से शुरू करूं… मुझे नहीं आता रोटी मांगने का सलीका… मुझे नहीं आता रोटी छीनने का …

मीडिया वाली बाई

1975 से 1977 तक देश में आपात-काल था ! “दबंग” इंदिरा गांधी ने पत्रकारों को झुकने को कहा था , कुछ रेंगने लगे, कुछ झुके और कुछ टूटने के बावजूद झुकने से इंकार कर बैठे ! 2014 का नज़ारा कुछ अलग है ! भाजपा और आर.एस.एस. के नरेंद्र नरेंद्र मोदी और उनकी टीम दबंगई की जगह भय और अर्थ के ज़रिये कूटनीतिक रवैया अपना रही है ! ये टीम धौंस और धंधे की मज़बूरी को बख़ूबी कैश कराना जानती है ! परदे के पीछे की धौंस और पत्रकारिता का लेबल लगाकर धंधा करना, मोदी-राज में यही दो वज़ह है जो पत्रकार की खाल में (द) लाल पैदा कर रही है ! बारीक़ी से नज़र डालें, तो अब पत्रकार की जगह ज़्यादातर मैनेजर्स नियुक्त किये जा रहे हैं ! बड़े चैनल्स की सम्पादकीय कही जाने टीम पर गौर-फ़रमाएंगें तो पायेंगें कि  निम्नतम-स्तर के ज़्यादातर पत्रकार और उम्दा कहे जा सकने वाले ये एजेंट ही सम्पादकीय लीडर बने फिर रहे हैं ! पत्रकारों की क़ौम को ही ख़त्म कर देने पर आमादा मोदी और उनकी टीम ने पत्रकारिता में शेष के नाम पर कुछ अवशेष छोड़ देने का बीड़ा उठाया है और इसे साकार कर के ही छोड़ने पर तुली है ! शर्म आती है ! मोदी और उनकी टीम को भले ही ना आये ! और आयेगी भी क्यों ? यही तो चाहत है !

दारुबाजी में पत्रकारों से होटल कर्मियों ने की मारपीट, मामला दर्ज

उरई (जालौन)। शहर के चर्चित शाकाहारी दांतरे होटल में दारुबाजी करना उत्‍तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के प्रदेश अध्यक्ष रतन दीक्षित को महंगा पड़ गया। विवाद हो जाने पर होटल के नौकरों ने उनके समेत कई पत्रकारों से मारपीट की। उनके साथ उपजा के प्रदेश मंत्री व यूनीवार्ता के कथित संवाददाता एवं हरदोई गूजर इंटर कालेज के शिक्षक दीपक अग्निहोत्री, लोकभारती के संवाददाता और उपजा का जिला कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश राठौर से भी होटल कर्मचारियों मारपीट की। बाद में होटल मालिक अनुराग दांतरे ने संजय मिश्रा सहित तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।

मोदी को ’24 घंटे वालों’ से डर लगता है!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सांसदों को कुछ बोलते हुए डर लगता है कि ‘24 घंटे वाले’ जाने क्या रंग दे डाले। मोदी ने संसद भवन परिसर में बालयोगी सभागार में कांग्रेस के करण सिंह, भाजपा के अरूण जेटली और जदयू के शरद यादव को ‘उत्कृष्ठ सांसद’ का पुरस्कार दिये जाने के लिए आयोजित समारोह में यह बात कही।