इंडिया न्यूज नंबर पांच पर लुढ़का, एबीपी न्यूज नंबर तीन की पोजिशन पर चढ़ा

45वें हफ्ते की बार्क की टीआरपी के आंकड़ों से पता चलता है कि एबीपी न्यूज ने नंबर तीन का अपना पुराना स्थान फिर से हासिल कर लिया है. जी न्यूज नंबर चार पर है. इंडिया न्यूज जो अभी तक नंबर तीन की पोजीशन पर हुआ करता था, नंबर पांच पर लुढ़क गया है. न्यूज नेशन ने छलांग लगाते हुए न्यूज24 की बराबरी कर ली है. देखिए टीआरपी डिटेल…

जानिए, नोटबंदी को लेकर ओशो ने कई साल पहले एक प्रवचन में क्या कहा था!

तुम जिसको पैसा समझते हो वह एक मान्यता है अगर किसी दिन सरकार बदल जाए और रातोंरात यह एलान किया जाए कि फलाँ-फलाँ नोट नहीं चलेगा तो तुम क्या करोगे ?
मान्यता को बदलने में देर कितनी लगती है?

यह उत्सवी देश परम पीड़ा से गुजर रहा है : यशवंत सिंह

मैंने कई कारपोरेट घरानों के बड़े लोगों से निजी तौर पर बात की. सबको छह माह पहले से पता था कि हजार और पांच सौ के नोट खत्म किए जाने हैं. मुझसे किसी एक ने संपर्क नहीं किया कि उसके यहां करोड़ दो करोड़ काला धन सड़ रहा है, उसे ह्वाइट कर दे. मैंने तमाम संभावित काले धनियों को फोन किया कि अगर कुछ हो तो बताओ, अपन लोगों के पास बहुते एकाउंट है खपाने के लिए, सबने कहा- सब सेटल हो गया.

बृजेश मिश्रा के इस्तीफा देने के बाद ईटीवी यूपी में हड़कंप, दर्जनों इस्तीफे, आफिस ने जारी किया मेल

बृजेश मिश्री ने ईटीवी यूपी के सीनियर एडिटर पद से इस्तीफा क्या दिया, मानो हड़कंप मच गया है. ईटीवी यूपी से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं. दर्जनों जिलों के ईटीवी के पत्रकारों ने अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. इस बीच चर्चा यहां तक फैल गई है कि ईटीवी बंद होने वाला है.

सुदर्शन में पुलिस का छापा, खुफिया बेडरूम में वीर्य के निशान, ‘काम’ पिपासु मालिक को यूं दिखाया आईना (सुनें टेप-देखें तस्वीरें)

कहने को तो सुदर्शन न्यूज चैनल हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की वकालत करता है लेकिन अंदर की बात ये है कि चैनल मालिक सुरेश चह्वाणके का मूल एजेंडा किसी तरह अय्याशी करना है. वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नाम पर पैसे ऐंठने के साथ साथ चैनल में महिलाओं की नियुक्ति कर उनकी इज्जत लूटता है. चैनल में काम करने वाली एक महिला मीडियाकर्मी ने काम पिपासु अपने चैनल मालिक को कैसे आइना दिखाया, जानना हो तो इस टेप को सुनिए.

लखनऊ में ‘लाइव टुडे’ की तरफ से ‘आपकी बात, आपकी आवाज’ का आयोजन

लखनऊ से सूचना है कि ‘लाइव टुडे’ नामक एक न्यूज चैनल की तरफ से एक समारोह का आयोजन किया गया जिसका नाम था- ‘आपकी बात, आपकी आवाज’. दावा किया जा रहा है कि ‘लाइव टुडे’ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रसारित होने वाला देश का पहला सैटेलाइट चैनल है. इस मौके पर तमाम राजनीतिक हस्तियों और ब्यूरोकेट्स ने हिस्सा लिया और अपनी बात लोगों तक पहुंचाई.

लखनऊ में ‘निष्पक्ष दिव्य संदेश’ अखबार के दफ्तर पहुंचे भड़ास के संपादक यशवंत

Rajendra K. Gautam : देश के सबसे चर्चित मीडिया पोर्टल भड़ास 4 मीडिया के संस्थापक और तेजतर्रार पत्रकार श्री यशवंत सिंह और लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नावेद शिकोह सोमवार को ‘निष्पक्ष दिव्य संदेश’ अखबार के ऑफिस आए। ऑफिस देख कर ये लोग बहुत प्रसन्न हुए। यशवंत ने इस दौरान कहा कि सदियों से उपेक्षित समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोग अपनी योग्यता के बल पर पत्रकारिता में अपनी बड़ी पहचान बना रहे हैं।

मोदी राज में पत्रकारिता करना मना है! सुनिए कारवां पत्रिका के पत्रकार की आपबीती

नोटबंदी से जनता को हो रही परेशानी छुपाने के लिए पुलिस ने पत्रकारों को धमकाना शुरू कर दिया है. घटना दिल्‍ली के सफ़दरजंग एनक्‍लेव की है जहां आइसीआइसीआइ बैंक के कर्मचारियों ने अंग्रेज़ी पत्रिका कारवां के पत्रकार सागर के साथ बदसलूकी की. फिर दिल्‍ली पुलिस ने आईकार्ड देखने के बाद भी उन्‍हें पत्रकार मानने से इनकार कर दिया. धमकाया यूं- ‘सरकार बदल गई है. ऐसे कहीं वीडियो मत बनाया कर.’

मीडिया इम्पलॉयर का राज दमन वाला राज है : एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस

जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले पर जानिये क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मीडियाकर्मियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस का नाम हमेशा सुर्खियों में रहा है। जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले पर मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट …

अखबार मालिक मजीठिया वेज बोर्ड लागू करें अन्यथा जेल जाएंगे : एडवोकेट परमानन्द पांडे

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मीडिया कर्मियों की तरफ अखबार मालिकों के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट परमानंद पांडे को मीडिया का भी काफी तजुर्बा है। वे इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के सेक्रेटरी जनरल भी हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके परमानंद पांडे पर मीडियाकर्मियों को पूरा भरोसा है। वजह भी साफ़ है। परमानंद पांडे मीडियाकर्मियों का दर्द जानते हैं। यही वजह है कि वे माननीय सुप्रीमकोर्ट में सटीक मुद्दा रखते हैं। जो बात कहना रहता है पूरे दम से कहते हैं। मजीठिया वेज बोर्ड मामले पर एडवोकेट परमानंद पांडे से बात किया मुम्बई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकान्त सिंह ने। पेश है बातचीत के मुख्य अंश…

अरविन्द प्रताप न्यूज़ वर्ल्ड से जुड़े, अरशद जमाल का सहारा में तबादला

अरविन्द प्रताप ने न्यूज वर्ल्ड चैनल के झारखण्ड के ब्यूरो हेड कम सम्पादकीय प्रमुख के रूप में नई पारी की शुरुआत की है. न्यूज़ वर्ल्ड का हेड ऑफिस भोपाल में है. अरविन्द प्रताप झारखण्ड मीडिया का एक जाना माना नाम है. इन्होंने दिल्ली से मास कॉम करने के बाद दिल्ली बेस्ड कई चैनलों में काम किया. उसके बाद लगभग चार सालों तक नक्षत्र न्यूज़ झारखण्ड बिहार में सीनियर एंकर कम एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में अपनी सेवाएं दी.

शांति भूषण, विवेक तिवारी, शादाब वारसी, मनीष वर्मा, रितेश झा, मनीष मित्तल, विकाश कुमार, विकास सैनी के बारे में सूचनाएं

दैनिक जागरण सोनीपत ब्यूरो के प्रमुख शांति भूषण का तबादला जम्मू कर दिया गया है. चर्चा है कि उन पर आरोप था कि उनके छोटे भाई ने सोनीपत में तीन करोड़ की धोखाधड़ी कर ली लेकिन इसकी खबर दैनिक जागरण में नहीं छपी. दूसरे सभी अखबारों ने धोखाधड़ी की खबर प्रकाशित की.

राष्ट्रोत्थान की फेसबुकी टिट्टिभि प्रवृत्ति

-अनेहस शाश्वत-

इस आर्टिकिल की शुरुआत की जाये इससे पहले टिट्टिभि प्रवृत्ति पर चर्चा लाजिमी है। हालांकि यह एक मिथिकीय कथा है। माना जाता है कि टिट्टिभि (टिटिहिरी) नामक बेहद छोटा पक्षी जब सोता है तो पंजे आसमान की तरफ कर लेता है। टिटिहिरी का मानना है कि उसकी निद्रा की दौरान अगर आसमान फट पड़े तो अपने पैरों पर वह उस बोझ को सम्भाल लेगी और धरतीवासियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने देगी। टिटिहिरी की यह प्रवृत्ति काबिले गौर और काफी हद तक हास्यास्पद है। भले वह गिरते आसमान को रोक पाये या नहीं।

लोकसत्ता के संपादक गिरीश कुबेर के मुताबिक नोटबंदी से कालेधन पर रोक न लगेगी

नोटबंदी पर लोकसत्ता के संपादक पत्रकार गिरीश कुबेर ने विशेष संपादकीय लिखकर मोदी सरकार के कदम की आलोचना की है. उन्होंने लिखा है कि इस फैसले से काला धन एवं भ्रष्टाचार पर रोक लगने की कोई गारंटी नहीं है। हां, आम लोगो की परेशानी जरूर बढ़ी है। दुनिया में किसी भी देश में नोटों को बंद करने और नई करंसी लाने से काला धन तथा भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है। कुबेर ने इस विशेष संपादकीय को “अर्थभ्रान्ति” (भ्रम फैलाने वाला) नाम दिया है। 

MUMBAI PRESS CLUB : KNOWLEDGE SERIES ON INVESTMENTS FOR JOURNALISTS

Dear Members,

As journalists, we are subject to irregular duty hours and busy with chasing stories after stories. As a result, most of our financials are in complete mess. We don’t have time to think for our future nor have a time to consult any financial planner. If one investsRs 5,000 per month in SIP for 30 years, it will convert to Rs 1.80 crore assuming a return of simple 12%. Sensex has given a CAGR return of 13% in last 30 years. Many of the journalists realise their mistake only when the time of retirement.

‘भोजपुरी सिनेमा’ चैनल अब टाटा स्काई और डेन नेटवर्क पर भी उपलव्ध

दुनिया भर के 25 करोड़ भोजपुरी दर्शकों के बीच ”भोजपुरी सिनेमा” एक मात्र ऐसा चैनल है जो प्रत्येक सप्ताह 42 नए फिल्मों का प्रसारण करता है। ऐसा अनुमान है कि 50 से भी अधिक फिल्मों के संग्रहण के साथ ”भोजपुरी सिनेमा” दुनिया का सबसे बड़ा भोजपुरी फिल्म पुस्तकालय है। दर्शकों को आकर्षित करने के प्रयास में भोजपुरी फिल्मों के सार्वजनिक प्रसारक ”भोजपुरी सिनेमा” चैनल को आसानी से देश भर के दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

सुरेंद्र बहादुर को 11 नवम्बर की शाम हिंदुस्तान देहरादून ज्वाइन करा लिया गया

गोरखपुर। एचएमवीएल कंपनी के हिंदुस्तान देहरादून यूनिट ने सुरेंद्र बहादुर सिंह को ज्वाइन करा लिया है। उन्हें 11 नवम्बर की शाम ही एचआर ने फोन कर बुलाया और बिना शर्त ज्वाइन करा लिया। इस बात की पुष्टि सुरेंद्र ने खुद की है। उन्होंने बताया कि वह माफी मांगकर ज्वाइन करने को तैयार नहीं थे। कंपनी ने बिना शर्त उन्हें वापस ले लिया है। मजीठिया वेज बोर्ड के लिये आवाज उठाने पर एचएमवीएल कंपनी के हिन्दुस्तान गोरखपुर यूनिट से देहरादून ट्रांसफर किये गये सुरेंद्र बहादुर सिंह ने वहां के उप श्रमायुक्त के माफी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

मुंबई हिंदी पत्रकार संघ ने बिहार में दैनिक भास्कर के पत्रकार की हत्या की निंदा की

मुंबई। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ बिहार के सासाराम में दैनिक भास्कर के पत्रकार धमेंद्र सिंह की गोली मार कर हत्या किए जाने की कड़ी निंदा करता है। सिंह को उस वक्त गोली मार दी गई जब वे सुबह घर के पास ही चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे, तभी एक बाइक पर सवार होकर आए तीन लोगों ने उन्हें गोली मार दी।  धर्मेंद्र को खनन माफिया से धमकियां भी मिली थी।

‘हिन्दुस्तान’ और ‘प्रभात खबर’ अखबारों में भड़ास पर लगा प्रतिबन्ध

बिहार और झारखण्ड में हिन्दुस्तान और प्रभात खबर जैसे अखबारों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को देखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जो कोई अपने मोबाईल पर भी इसे देखते पाया जायगा उसके  खिलाफ कारवाई की चेतावनी मौखिक रूप से दे दी गयी है. इन अखबारों के आफिसों में रखे कंप्यूटरों पर भड़ास को पहले से ही बैन किया हुआ है. मजीठिया वेज बोर्ड संबंधी खबरों और इन अखबारों की मदर कंपनियों के खिलाफ खबरों के लगातार प्रकाशन और मैनेजमेंट की काली करतूतों का भंडाफोड़ करने से भड़ास पर प्रतिबंध लगाया गया है.

ब्रेन-हैमरेज के अटैक से उबर रहे वरिष्ठ पत्रकार जयनारायण प्रसाद

लाये गये अपने कर्मनगर कोलकाता…  दो हफ्ते पहले शिरडी में घातक मस्तिष्काघात झेलने के बाद जनसत्ता-कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार जयनारायण प्रसाद अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं. नासिक अपोलो अस्पताल में हालत सुधरने के बाद उन्हें दो दिन पहले भतीजे फ्लाइट से कोलकाता ले आये. अब यहां न्यूरो सर्जन और फिजियोथेरपिस्ट की मदद से उन्हें सामान्य हालत में लाने की कोशिश हो रही है. रविवार (06.11.2016) शाम कोलकाता के खिदिरपुर बाबू बाज़ार स्थित उनके घर जाने पर हालचाल जाना. उनमें हो रहा सुधार देख कर तसल्ली हुई. उठ, बैठ व चल पा रहे, सबको पहचान रहे, नित्यक्रिया में समर्थ हो गये हैं, धीमी आवाज़ में बात कर पा रहे, लेकिन रह-रह कर इष्ट-मित्रों को पास देख सुबक पड़ते हैं, जैसे उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि नियति के क्रूर वार से वह साफ बच निकले हैं.

‘नयी दुनिया’ अखबार में पे-रोल सिस्टम गड़बड़ाया, रुकी तनख्वाह

दैनिक जागरण के सिस्टर कन्सर्न नयी दुनिया से खबर आ रही है कि इंदौर संस्करण में नयी दुनिया का पे-रोल सिस्टम गड़बड़ा गया है और इसमें तकनीकी खराबी आ गयी है। इसकी वजह से यहाँ कर्मचारियों का वेतन विलम्ब से मिलेगा। नयी दुनिया इंदौर ने इसकी सूचना नोटिस बोर्ड पर भी लगाई है और कर्मचारियों से सहयोग की उम्मीद की है। वैसे एक सवाल ये भी उठता है कि अगर वेतन में विलम्ब होना है तो कर्मचारियों को एडवांस कुछ रकम भी तो दी जा सकती थी लेकिन नहीं दिया गया।

मजीठिया वेतनमान: काश! कोर्ट से पूछने का अधिकार होता…

मजीठिया वेतनमान मामले में अगर मुझे सुप्रीम कोर्ट से पूछने का अधिकार होता तो पूछता कि आपको यह न्यायालय के अवमानना का मामला क्यों नहीं लगता? पत्रकारों को मजीठिया वेतनमान दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कई कदम उठाए हैं लेकिन प्रेस मालिकों पर इसका तनिक भी भय नहीं है। अधिकांश पत्रकार आज भी मजीठिया वेतनमान के लिए तरस रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दो साल से न्यायालय अवमानना का सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

श्रीलंका से लौटे पत्रकार दयानंद पांडेय का एक अदभुत यात्रा वृत्तांत पढ़िए

दीप्तमान द्वीप में सागर से रोमांस

आज पंद्रह दिन हो गया है श्रीलंका से लौटे हुए लेकिन कोलंबो में सागर की लहरों का सुना हुआ शोर अभी भी मन में शेष है । थमा नहीं है । यह शोर है कि जाता ही नहीं । कान और मन जैसे अभी भी उस शोर में डूबे हुए हैं । उन दूधिया लहरों की उफान भरी उछाल भी लहरों के शोर के साथ आंखों में बसी हुई है । लहरों का चट्टानों से टकराना जैसे मेरे मन से ही टकराना था । दिल से टकराना था । लहरों का यह शोर मेरे मन का ही शोर था । मेरे दिल का शोर था । यह शोर अब संगीत में तब्दील है शायद इसी लिए अभी भी मन में तारी है । स्मृतियों में तैरता हुआ । तो क्या यह वही शोर है , वही दर्प है जो राम को समुद्र पर सेतु बनाने से रोक रहा था ? जिस पर राम  क्रोधित हो गए थे ? तुलसी दास को लिखना पड़ा था :

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥

सुरेंद्र ने न माफी मांगी और न ही एचएमवीएल ने उन्हें ज्वाइन कराया है!

गोरखपुर। मजीठिया वेज बोर्ड के लिये आवाज उठाने पर एचएमवीएल कंपनी के हिन्दुस्तान गोरखपुर यूनिट से देहरादून ट्रांसफर किये गये सुरेंद्र बहादुर सिंह ने वहां के उप श्रमायुक्त के माफी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने न माफी मांगी है न कंपनी ज्वाइन की है। इस बात की पुष्टी उन्होंने स्वयं की है। बीते दो दिनों से अफवाहों का बाजार गरम था कि सुरेंद्र ने माफी मांगकर अखबार ज्वाइन कर लिया है।

‘बीबीसी हिंदी’ के संपादक बने मुकेश शर्मा

बीबीसी हिंदी के संपादक के रूप में मुकेश शर्मा ने ज्वाइन किया है. इसके पहले संपादक निधीश त्यागी थे जो इस्तीफा देकर नेटवर्क18 समूह के साथ जुड़ गए हैं. लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक मुकेश आईआईएमसी 2001 बैच के छात्र रहे हैं. वे न्यूज एजेंसी यूनिवार्ता में काम कर चुके हैं. वे 2007 में बतौर प्रोड्यूसर बीबीसी लंदन से जुड़े. 2007 में भारत लौटे तब स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज बने. मुकेश को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कमांड है. वे बिहार के छपरा जिले के रहने वाले हैं.

दूरदर्शन के डिबेट शो ‘ओपेनकोर्ट’ की दिल्ली में हुई लांचिंग

समसामयिक विषयों पर राष्ट्रवादी पत्रकारिता और जनकेन्द्रित विचारधारा के साथ जिंदगी के तमाम जरूरी मगर अनछुए पहलुओं को रोचक तरीके से प्रस्तुत करने की वचनबद्धता के साथ हम टॉक, डिबेट और डिस्कशन शो ‘ओपेनकोर्ट’ 26 दिसंबर से दूरदर्शन के साथ मिलकर शुरू करने जा रहे हें। हमारी कोशिश है कि यह शो अनेक इवेंट और बड़े कार्यक्रमों को भी कवर करेगा और डी डी इंडिया और डी डी वन को एक नयी संजीवनी देगा। समाजसेवा, लोकसेवा, राजनीति, रंगमंच, फिल्मों, खेल, मीडिया, कानून आदि सभी क्षेत्रो से जुडी ऐसी सभी हस्तियों से हम डायलॉग करेंगे और आप रूबरू होंगे जो किसी न किसी रूप में भारत की भारतीयता, पुनर्निर्माण और मौलिक स्वरुप को पुनर्स्थापित करने के लिए लगे हैं।

ईटीवी यूपी से चीफ रिपोर्टर वीरेंद्र सिंह का भी इस्तीफा, मनमोहन राय करेंगे ज्वाइन

ईटीवी यूपी को झटके पर झटका लग रहा है. सीनियर एडिटर और यूपी हेड बृजेश मिश्रा के कल इस्तीफा देने के बाद सूचना आ रही है कि चीफ रिपोर्टर वीरेंद्र सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है. नई खबर ये है कि टाइम्स ग्रुप के मनमोहन राय ईटीवी यूपी में चीफ रिपोर्टर के रूप में ज्वाइन कर रहे हैं. ईटीवी यूपी का नया संपादक कौन होगा इसको लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि मनमोहन राय ही नए संपादक होंगे जबकि ईटीवी के लोगों का कहना है कि वह चीफ रिपोर्टर के पद पर ही ज्वाइन करेंगे, नए संपादक की तलाश अभी चल रही है. कुछ लोगों का कहना है कि ईटीवी के दूसरे प्रदेशों के संपादकों पर भी गाज गिरने वाली है.

बिहार में दैनिक भास्कर के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह की गोली मार कर हत्या

बिहार से दुखद सूचना आ रही है। सासाराम जिले के अमरा तालाब इलाके के दैनिक भास्कर के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह को आज सुबह तीन गोली मारी गयी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन बाद में उनकी मौत हो गयी। एक पत्रकार को सरेआम गोली मार कर हत्या कर देने से बिहार के पत्रकार स्तब्ध हैं।

ईटीवी यूपी के वरिष्ठ संपादक बृजेश मिश्र का इस्तीफा

ईटीवी से एक बड़ी खबर आ रही है। ईटीवी उत्तर प्रदेश के सीनियर एडिटर बृजेश मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के कारणों का पता नहीं चल पाया है। चुनाव से ठीक पहले बृजेश मिश्रा जैसे कद्दावर पत्रकार के ईटीवी यूपी से जाने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं। बृजेश ने यूपी में etv को बुलंदियों पर पहुँचाया। 

आजतक और एबीपी न्यूज़ को तगड़ी बढ़त, न्यूज़24 और न्यूज़ नेशन को चपत

44वें हफ्ते के टीआरपी आंकड़ों में आजतक और एबीपी न्यूज ने तगड़ी बढ़त हासिल की है जबकि न्यूज24 और न्यूज नेशनल को चपत लगी है. टीआरपी डिटेल इस प्रकार है..

नोट बदलने का खेल एक शुद्ध राजनैतिक छलावा!

काला धन, काला धन, काला धन … ये संकल्पना ही सिरे से गलत है . दरअसल राजनैतिक पैतरे बाज़ी का यही कमाल है और बाबु किस्म के जीव इस पैतरे बाज़ी में अपना करियर चुनते हैं जिसे प्रोफेशन कहते हैं और उन बाबुओं को प्रोफेशनल . साफ़ और सच बात ये है कि पैसा घोषित होता है या अघोषित होता है ..काला या सफेद नहीं होता . लेकिन सारे के सारे जनता को काले पैसे के नाम पर गुमराह कर रहे हैं और बहुमत वाली सरकार उस काले धन को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध और देश भक्त है ..बाकी सब इस बहुमत वाली सरकार की नज़र में क्या है? ये अब कहने की जरूरत नहीं …

जस्टिस काटजू का मोदी के नाम खुला खत- 500 और 1000 के नोट रद्द करने वाले पागलपन भरे आदेश को निरस्त करें

My appeal to the Central Govt. regarding demonetization of Rs. 500 and 1000 notes.

Dear Mr. Modi,

Please immediately revoke this harebrained, asinine, madcap and reckless order of yours.

सुप्रीम कोर्ट को समझ में आ गया है कि मीडियाकर्मियों का हित क्या है और अखबार मालिकों की बेईमानी का इलाज क्या है।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मीडियाकर्मियों की हर हाल में मदद करना चाहता है सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर को हुई सुनवाई में मजीठिया वेज बोर्ड मामले को जल्दी निपटाने की दिशा में एक पहल की गई। यह तय किया गया है कि एक समिति या एक एसआईटी या एक मानीटरिंग कमेटी बना दिया जाए जो सारे मामले को अंजाम तक पहुंचाए। साथ ही राज्यों के लेबर कमिश्नरों की रिपोर्ट पर अब चर्चा न होकर सीधे मजीठिया मामले की कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने का दौर शुरू होगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट 23 अगस्त की सुनवाई के बाद इस मामले के सबसे विवादित और महत्वपूर्ण पहलू 20(जे) तथा अनुबंध पर रखे गए कर्माचारियों के मुद्दे पर चर्चा करने के आदेश दिए थे लेकिन 4 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के वकीलों की दलीलों के कारण स्थिति गड्डमड हो गई।

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाने का निर्देश दिया

सही दिशा में जा रही है जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई :  देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन एरियर तथा प्रमोशन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाने का निर्देश दिया है। इस एसआईटी को लीड करेंगे हाईकोर्ट के एक रिटायर जज। आखिर …

आईबीएन7 का नाम बदला, अब ‘न्यूज18इंडिया’ कहा जाएगा

कई सालों से पिटा हुआ चैनल आईबीएन7 नाम बदलकर टीआरपी पाने के टोटके को आजमाने जा रहा है. अंबानी का यह चैनल अब ‘आईबीएन7’ की बजाय ‘न्यूज18इंडिया’ कहा जाएगा. ‘नेटवर्क 18’ ग्रुप के इस हिंदी न्यूज चैनल का नाम बदलने के साथ साथ टैगलाइन, लेआउट, लुक एंड फील सब बदल दिया गया है.

मोदी को पता है 57 लोग देश का 85 हज़ार करोड़ डकारे हैं लेकिन इन्हें पकड़ने की हिम्मत नहीं

Dilip Khan : रिजर्व बैंक ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 57 लोगों ने बैंकों के 85 हज़ार करोड़ रुपए दबा रखा है। सरकार को इन 57 लोगों की गर्दन मरोड़नी चाहिए। हल्ला भी कम मचता। 30-40 हज़ार करोड़ रुपए के लिए हल्ला मचा दिया। दो नोटों को ख़त्म करके देश भर में लोगों को परेशान कर दिया। ब्लैक मनी ज़ब्त कीजिए। लेकिन जो कदम आसान था पहले वो उठाइए। आप इकोनॉमी को दुरुस्त करने के लिए काम कर रहे हैं कि हल्ला मचाने के लिए?

वरिष्ठ छायाकार हरजिंदर सिंह और पत्रकार अरविन्द श्रीवास्तव का निधन

लखनऊ : एक दुखद खबर है. वरिष्ठ छायाकार हरजिंदर सिंह का निधन हो गया है. उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट हरजिंदर सिंह के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. हिन्दी दैनिक ‘आज’ से बीते कई दशकों से संबद्ध रहे हरजिंदर सिंह का हृदयगति रुकने से निधन हो गया है.

मोदी तो बेचारे ऐसे फंसे कि पलटी भी नहीं मार सकते… जनता जमकर गरिया रही है गुरु… (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : केजरीवाल का आड इवन और मोदी का करेंसी रद्द फैसला इतिहास याद करेगा. दोनों में बड़े लोगों / बड़े चोरों को कोई नुकसान नहीं था. दोनों में आम जन को मुश्किलों का सामना करना पड़ा… केजरीवाल ने तो समय रहते जनता को मूड समझ लिया और आड इवन को रद्दी की टोकरी में डाल दिया.. लेकिन मोदी तो बेचारे ऐसे फंसे कि अब पलटी भी नहीं मार सकते…. जनता जमकर गरिया रही है गुरु… जरा फेसबुक ट्वीटर छोड़ो और बैंकों की तरफ निकलो… उनसे पूछो जिनके घरों में बेटियों की शादियां हैं अगले कुछ दिनों में… उनसे पूछो जो मजदूरी करते थे दुकानों, मकानों, कांस्ट्रक्शन कंपनियों में.. सब ठप पड़ा है… भूखों मरने की नौबत आने वाली है..

इंडिया न्यूज़ के एडिटर इन चीफ (निवर्तमान!) दीपक चौरसिया के ‘न्यूज़सेंस’ को देश को जानना चाहिए

जेएनयू की ख़बर के साथ इंडिया न्‍यूज़ में शीर्ष स्‍तर पर क्या और कैसे खिलवाड़ किया गया… 17 फरवरी की रात इंडिया न्यूज में क्‍या हुआ था… इसके बारे में खुलकर विस्तार से इंडिया न्‍यूज़ में वरिष्‍ठ पद पर काम कर चुके प्रतिभाशाली पत्रकार अमित कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर लिख कर बताया है जो इस प्रकार है…

Amit Kumar

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए पत्रकार भी टिकट की दौड़ में…

उत्तराखंड चुनाव निकट है इसलिये इस पर्वतीय राज्य में भाजपा और कांग्रेस जैसी प्रमुख पार्टियों में विधानसभा टिकट को लेकर जोर आज़माइश शुरू हो चुकी है। नैनीताल की भीमताल सीट से लम्बे समय तक टीवी पत्रकार रहे ध्रुव रौतेला भी प्रबल दावेदार के रूप में उभर के सामने आये हैं। दरअसल बीते जून में भाजपा से ही भीमताल के विधायक रहे दान सिंह भंडारी अचानक खेमा बदलते हुए इस्तीफा देकर हरीश रावत के साथ मिल गये और कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। तभी से इस सीट को लेकर भाजपा का नेतृत्व संजीदा है और किसी कैडर बेस्ड टिकाऊ प्रत्याशी को चाहता है।

देश में आर्थिक आपातकाल लगा जनता को बुरे हाल में छोड़ कर विदेश निकल लिए प्रधानमंत्री जी (देखें वीडियो)

Abhishek Sharma : मोदी जी, झांसा किसे? बहुत बड़ा अर्थशास्त्री नही हूँ, जितना आम आदमी को अर्थ की जानकारी है, हां, उससे थोड़ा 19-20 होगा ही। 24 घंटे का ड्रामा बहुत हो गया। अब आप जापान निकल लिए। ठीक है। जरुरी दौरे करें। देश तरक्की करे। आपके दौरों से इससे ज्यादा न मुझे न किसी और को कुछ चाहिए। बात अचानक नोट बंद करने की है। इतना तो मैं क्या आम आदमी भी जानता है कि देश के कुल धन का आधा टॉप 100 उद्योगपतियों के पास है। इनको सरकार नये इन्वेस्टमेंट में छूट देती है, लोन देती है, उनको कागजी मदद भी।

करेंसी यूं रद्द करने से देश कैसे आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है, समझा रहे यशवंत

Yashwant Singh : एक बड़ी आर्थिक मंदी की चपेट में देश आ सकता है. नोट करेंसी रद्द / बंद करने का एक साइडइफेक्ट यह भी आशंकित है. क्या आप बताएंगे या मैं समझाऊं? ध्यान रखिए, मेरी आशंका अंध मोदी विरोध टाइप कतई नहीं है. विशुद्ध आर्थिक कारणों पर आधारित है. नोट बदलने, करेंसी रद्द करने …

एचजेएस परीक्षा प्रकरण में काउंटर तलब, कोर्ट ने माना- इस मामले में गहन अवलोकन की जरूरत

नियमों में अष्पष्टता की बात भी कही गयी परंतु मुख्य परीक्षा पर रोक नही

इलाहाबाद। एच.जे.एस. प्रारंभिक परीक्षा २०१६ के परिणाम को चुनौती दिये जाने के प्रकरण में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने ही प्रशासनिक पक्ष से विस्तृत काऊंटर दाखिल करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका के माध्यम से याची सुमेधा तिवारी द्वारा इस परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय (प्रशासनिक पक्ष) द्वारा कराई जाने वाली एच.जे.एस. परीक्षा के प्रारंभिक चरण का परिणाम २१ सितंबर को घोषित किया गया था।

कालेधन पर मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक का सच सुनिए भड़ास के एडिटर यशवंत से

Yashwant Singh : नेताओं और अफसरों का जो विदेशों में काला धन जमा है, वह सबसे बड़ा, सबसे ज्यादा काला धन है, उसे सबसे पहले निकालना चाहिए, उसे रखने वालों का नाम खोलना चाहिए, यह मेरा मत है. उसके बाद सेकेंड फेज में ये करेंसी बदलने वाला काम करना चाहिए.

दैनिक जागरण ने अब तक नहीं दिया मजीठिया वेज, परंतु कर्मचारियों का शोषण जारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी जागरण मैनेजमेंट के लोग अब तक कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ तो दूर, सम्मानित वेतन तक नहीं दे रहे। एक ही वेतन में दो कार्य (अखबार के लिए रिपोर्टिंग/एडिटिंग और डिजिटल के लिए ऑनलाइन ब्रेकिंग) लिया जा रहा है। लगातार शोषण से जागरण के कर्मी परेशान है। जागरण मैनेजमेंट झूठ पर झूठ बोल रहा है।

मोदी के फैसले से आर्थिक आपातकाल, देशभर में हाहाकार

40 प्रतिशत से ज्यादा कालेधन का है बाजार में चलन, सभी तरह का कारोबार पड़ा ठप

राजेश ज्वेल

इंदौर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मास्टर स्ट्रोक ने जहां आम आदमी को फिलहाल पसंद किया वहीं तमाम कारोबारी माथा पकड़कर बैठे हैं। 500-1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा के साथ ही देशभर में हाहाकार मच गया और आर्थिक आपातकाल से हालात हो गए, क्योंकि साग-सब्जी वाला भी 500 रुपए का नोट लेने से इनकार कर रहा है और आज से तो वैसे भी ये बड़े नोट कागज के टुकड़े साबित हो गए हैं। देश की 40 प्रतिशत से ज्यादा इकॉनोमी कालेधन से ही चलती रही है। लिहाजा एकाएक इस पर ब्रेक लगा देने से हर तरह का कारोबार ठप पड़ जाएगा।

देश की 86 फीसदी करेंसी रद्दी हो गई… काले धन का 5 प्रतिशत भी बड़े नोट की शक्ल में नहीं है…

Daya Sagar : देश की 86 फीसदी करेंसी रद्दी हो गई। इसमें अगर 50 फीसदी करेंसी को भी अगर हम काला धन मान लें तो वह चलन से बाहर हो गई। यानी आज की तारीख में भ्रष्ट लोगों के पास काले धन के नाम पर अचल सम्पत्ति और सोना बचा होगा। कैश बिलकुल नहीं होगा। बेशक ये एक बड़ी उपलब्धि है। बाकी सारा कैश पैसा जो अब तक अन-आकाउंटेड था। वह सब अकाउंटेड हो जाएगा। बेशक इससे हमारी अर्थव्यवस्‍था मजबूत होगी। मुझे नहीं लगता कि अगले कुछ सालों में किसी के पास रिश्वत देने के लिए भी कोई पैसा होगा। सबके पास अकाउंटेड मनी होगी। यानी रिश्वत खोरी बंद। कोई भी ईमानदार अर्थव्यवस्‍था कैश लैस होती है। उसमें सारे लेनदेन चेक और प्लास्टिक मनी के जरिए होते हैँ। इस प्रयोग का प्रयास यही है कि हमारी अर्थ व्यवस्‍था कैश लैस हो। साफ सुधरा काम हो। तो इसमें दिक्कत क्या है भाई? आपकी समझ में क्या नहीं आ रहा है?

देश में एक तरह से आर्थिक आपातकाल लागू हो गया है…

Hareprakash Upadhyay : ”देश में एक तरह से आर्थिक आपातकाल लागू हो गया है। ट्रेन में हूँ, पाँच सौ का नोट है पर्स में पर पीने को पानी नहीं मिल रहा है। ट्रेन से जब उतरूँगा, तो घर कैसे जाऊँगा? दो दिन बैंक व एटीएम भी बंद है। घर में भी अगर सौ-पचास का नोट नहीं होगा तो राशन कैसे आएगा? जो रे मोदिया… बड़े अच्छे दिन लाये बेटा… लोग कह रहे हैं कि कल पेट्रोल पंप वाले बदल देंगे, तो क्या कल पेट्रोल पंपों पर सौ-पचास रुपये का छापाखाना खुलने वाला है? कल पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ेगी तो खुदरा मिलना तो छोड़िये पेट्रोल मिलना मुश्किल हो जाएगा।”

कंचन प्रिंटिंग प्रेस और लक्ष्मी प्रिंटिंग प्रेस को लेकर दैनिक जागरण के मालिकों ने लेबर कोर्ट में बोला झूठ

कंचन प्रिंटिंग प्रेस जागरण का हिस्सा नहीं… जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने कर्मचारियों का लगातार उत्पीड़न कर रहे दैनिक जागरण के मालिकान अब बिना किसी ठोस आधार के लेबर कोर्ट में झूठ बोल रहे हैं। 11 नवंबर 2011 को भारत सरकार ने पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन तथा भत्ते से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।इस अधिसूचना में अंग्रेजी के पेज नंबर 12 पर साफ़ लिखा है कि अखबार की सभी इकाइयों,शाखाओं तथा केंद्रों को उसका अंग माना जाएगा मगर  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर दैनिक जागरण प्रबंधन गंभीर नहीं है।

नज़र रखिए, NDTV का ओपिनियन पोल आएगा जिसमें बीजेपी की सरकार यूपी में बनती दिखेगी!

Dilip C Mandal : एनडीटीवी बाक़ी समय सेकुलरिज्म का नाटक करता है, ताकि चुनाव के समय जब वह BJP का समर्थन करे तो लोग उस पर भरोसा करें। 2004, 2009, 2015….NDTV ने हर बार ग़लती की। हर बार BJP के पक्ष में ग़लती की। यूपी चुनाव में NDTV क्या करेगा? यह ट्विट आज भी बरखा दत्त के ट्विटर हैंडल पर मौजूद है। बिहार में BJP को दो तिहाई बहुमत दिला रही थीं मोहतरमा।

देखिए गिरीश निकम का वो आखिरी शो जिसे पूरा करने के बाद वे चले गए

Prakash K Ray :  वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम हमारी पीढ़ी के मीडियाकर्मियों के लिए आदर्श थे. नोएडा के राज्यसभा टीवी में जब भी किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने गया, उनसे ज़रूर भेंट हुई. जब स्टूडियो रकाबगंज रोड पर आया, तब कम मिल सका. उनसे अपने अख़बार प्रभात खबर के लिए कुछ लिखने का आग्रह का आग्रह दो बार किया, उन्होंने दोनों बार मेरा निवेदन स्वीकारा. फ़ेसबुक पर उनसे भिन्न राय रखते हुए कई बार पोस्ट किया, तो बड़ी शालीनता और बड़प्पन से जवाब देते थे. संदेशों के माध्यम से भी बात होती रही. कहते थे कि जल्दीबाज़ी में निष्कर्ष मत निकाला करो.

अर्णब गोस्वामी और रवीश कुमार पत्रकारिता के दो विपरीत छोर हैं : उदय प्रकाश

Uday Prakash : There have been two striking popular and leading poles in TV journalism spirited these days. One in English and the other in Hindi. I’m always skeptical about Hindi as it’s always characterized by the people who represent it, in politics, culture and media. My friends here on Facebook know about my views through my posts time and again. One of the poles, in English was Times Now, anchored by Arnab Goswami and the other, in Hindi is NDTV, with its anchor Ravish Kumar. 

निर्भीक पत्रकार और यारों के यार Girish Nikam से मेरा परिचय पहले बॉस के तौर पर हुआ

Syed Mohd Irfan : अभी तीन घंटे पहले उन्होंने पीछे से आवाज़ लगाई- ‘इरफ़ान’। हम 10 मिनट में RML ले आये उन्हें। इलाज शुरू हो गया। बस घंटे भर में वो हमें छोड़ गए। पता नहीं कैसा रिश्ता था उनसे मैं कभी समझ नहीं पाया। महीनों न मिलें लेकिन हमेशा लगता था कि बस थोड़ी देर पहले ही छूट गई बातों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है। राज्य सभा टीवी ज्वाइन करने पर ही हमने एक दूसरे को जाना था और हमारे बीच नजदीकी की वजह ‘गुफ्तगू’ बना, जिसके वो इतने मुरीद थे कि हर मिलने जुलने वाले से गुफ्तगू की तारीफ़ और साथ मेरी ऐसी तारीफें कि कभी-कभी ऐसी महफिलों में मैं कोशिश करता कि उनकी नज़र मुझ पर न पड़े लेकिन वो आवाज़ लगा ही देते- ‘इरफ़ान’।

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम दिल्ली में छाए प्रदूषण की बलि चढ़ गए!

Gurdeep Singh Sappal : गिरीश निकम चले गए। मौत ने पिछले साल भी उनके दिल पर दस्तक दी थी। तब भी उनकी धड़कन को पूरी तरह जकड़ कर थाम दिया था। लेकिन न्यूयॉर्क की आपात मेडिकल सुविधाओं ने उसे परास्त कर दिया था। मौत, जो सिगरेट और रम के बुलावे पर आयी थी, धीरे धीरे पीछे हटती गई, वेंटिलेटर पर साँसें वापिस सामान्य होती गयी। गिरीश जी उठे और वापिस स्क्रीन पर छा गए।

गौर से देखा जाए तो NDTV जीत कर भी हार गया है!

Vishnu Gupt : एनडीटीवी के सामने मोदी सरकार ने किया समर्पण, प्रतिबंध किया स्थगित, एनडीटीवी के खिलाफ अभियान चलाने वाले ठगे गये… यह मोदी सरकार की वीरता नहीं है। मोदी सरकार की यह दूरदृष्टि नहीं है। मोदी सरकार ने उन लाखों देशभक्तों के प्रयास पर पानी फेर दिया जो एनडीटीवी के राष्ट्रविरोधी प्रसारणों और इसकी पाकिस्तान परस्ती के पोल खोलने में लगे थे। जब औकात नहीं थी तो फिर मोदी सरकार को यह कदम उठाना ही नहीं चाहिए था, अगर कदम उठाया था तो उस पर अमल करना चाहिए। लग रहा था कि पहली बार कोई सरकार हिम्मत दिखायी है। पर मोदी सरकार भी डरपोक, रणछोड़ निकली। हमारे जैसे लोग जिन पर विश्वास करता है वही रणछोड हो जाता है, वही डरपोक हो जाता है। अब एनडीटीवी सहित पूरे मीडिया का देशद्रोही और पाकिस्तान परस्ती पत्रकारिता सिर चढकर बोलेगी।

आदर्श पेलने वाले अखबार मालिकों की असलियत

कुछ भी हो, मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों ने अच्छे-अच्छों की पोल खोल कर रख दी है… दुनिया भर का आदर्श पेलने वाले अखबार मालिकों की असलियत देखनी हो तो बस, एक बार मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक़ अपनी सैलरी एवं बकाया की मांग कर के देख लीजिये!

सईद इरशाद हुसैन और अनूप देव की नई पारी

सईद इरशाद हुसैन ने स्पोर्ट्सकीड़ा डाट काम से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने नई पारी स्पोर्ट्स फ़्लैशेज़ डाट काम के साथ बतौर कंटेट हेड शुरू की है… स्पोर्ट्स फ़्लैशेज़ रमन रहेजा की कंपनी है. रमन रहेजा वर्ल्ड कबड्डी लीग के संस्थापक रह चुके हैं. साथ ही वह IIFA अवॉर्ड्स के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में से भी एक रहे हैं. सईद इरशाद हुसैन ज़ी पुरवईया, इंडिया टीवी, न्यूज़ एक्सप्रेस आदि में काम कर चुके हैं. वे स्पोर्ट्स फ़्लैशेज़ में वीडियो की ज़िम्मेदारी और एंकरिंग के साथ साथ कंटेट हेड की भूमिका में रहेंगे.

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम की हार्ट अटैक से मौत

वरिष्ठ पत्रकार गिरीश निकम की हार्ट अटैक से आज शाम मौत हो गयी। वे राज्यसभा टीवी के लिए अपने लोकप्रिय शो ‘बिग पिक्चर’ की रिकॉर्डिंग करने के बाद स्टूडियो से बाहर निकले थे। उसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।  राज्यसभा टीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ गुरदीप सिंह सप्पल ने गिरीश निकम को श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट का प्रकाशन किया है जो इस प्रकार है…

NDTV पर नहीं लगेगा बैन, आदेश स्थगित

केंद्र सरकार ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के बैन लगाने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इस प्रतिबंध को NDTV ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल यानी मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी.

एबीपी न्यूज़ को पछाड़ ज़ी न्यूज़ पहुंचा नंबर चार पर, इंडिया न्यूज़ का जलवा कायम

जी न्यूज ने एबीपी न्यूज को पछाड़कर नंबर चार की पोजीशन पर कब्जा कर लिया है. उधर, इंडिया न्यूज लगातार नंबर तीन पर कायम रह अपना जलवा दिखा रहा है. यह सब तब हो रहा है जब दीपक चौरसिया चैनल से हट चुके हैं. 43वें सप्ताह के टीआरपी के आंकड़े इस प्रकार है… 

आर सी शुक्ला ने IBN7 से दिया इस्तीफ़ा, जल्द करेंगे नए क़दम का ऐलान

एक बड़ी खबर IBN7 से आ रही है । चैनेल के एग्जीक्यूटिव एडिटर आर सी शुक्ल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है । यहाँ पे उनका कार्यकाल करीब 2 साल का रहा । आर सी ने 16 जनवरी 2015 को आज तक से आकर IBN7 ज्वाइन किया था । उस दौरान IBN7 की हालत बहुत ख़राब थी । ये चैनल NDTV से भी नीचे यानि 10वे नंबर का चैनल लगातार बना हुआ था ।   

inext की कई यूनिटो में क्यों तूफान आया हुआ है?

Inext Allahabad, Varanasi, Bareilly aur Gorakhpur unit Mein tufan aaya hai…. Tufan koi aur nahi balki I next ke purane khiladi Shree Vishwanath Gokaran hai… Chahe Bareilly Ki unit Ho ya fir Allahabad, Gorakhpur, Koi aisa din na ho ki team ke kisi bhi sadasya ko ye force leave ya nikalne ke liye pressure na banate ho. In teen edtion ke incharge ko aksar mail ke jariye pressure banate rahte hai… is chkkar mein bareilly ke incharge se aaye din inki bahas hoti hai.

प्रणव रॉय टूटपूंजियां पत्रकार से कैसे बना एनडीटीवी मीडिया उद्योग का मालिक?

क्या सही में देश के अंदर आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है? क्या सही में देश के अंदर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संकट खडा हो गया है? क्या सही में नरेन्द्र मोदी सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गल्ला घोटने के रास्ते पर चल रही है? क्या सही में एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध पूरे मीडिया को निशाने पर लेने की कार्रवाई मानी जानी चाहिए? क्या कांग्रेस की मनमोहन सरकार में इलेक्टोनिक मीडिया पर प्रतिबंध नहीं लगा था? आज शोरगुल मचाने वाले तथाकथित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हथकंडेबाज उस समय कहां थे जब मनमोहन सिंह सरकार ने लाइव इंडिया टीवी चैनल पर एक सप्ताह का प्रतिबंध लगाया था? एनडीटीवी के पक्ष में वैसे लोग और वैसी राजनीतिक पार्टियां क्यों और किस उद्देश्य के लिए खडी है जो खुद अभिव्यक्ति की आाजदी का गल्ला घोटती रही हैं, जिनके अंदर लोकतंत्र नाम की कोई चीज ही नहीं है, ऐसी राजनीतिक पार्टियां क्या एक प्राइवेट कंपनी के रूप में नहीं चल रही हैं?

एनडीटीवी पर प्रस्तावित बैन के खिलाफ देहरादून में धरना (देखें तस्वीरें)

देहरादून। जन संवाद मंच के आह्वान पर विभिन्न संगठनों ने गांधी पार्क पर धरना दिया। इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के पदाधिकारी विजय भट्ट ने कहा कि, इधर कुछ महीनों से संवैधानिक व जनतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बढ़ता जा रहा है । तथाकथित हिंदूवादी संगठन कभी गौहत्या के बहाने तो कभी गोमांस सेवन के बहाने तो कभी लव जेहाद या तीन तलाक के बहाने हमें लड़ा रहे हैं। अब इन्होंने मीडिया पर हमला बोल दिया है हमें इस तरह के खतरों के प्रति सचेत होना पड़ेगा।

‘ओके इंडिया’ न्यूज चैनल नहीं दे रहा अपने पत्रकारों को पैसा

‘ओके इण्डिया’ नामक न्यूज चैनल कर रहा पत्रकारों का शोषण. आठ महीनों से नहीं दिए न्यूज का पेमेंट. अपने आपको नेशनल न्यूज चैनल बताने वाला ओके इण्डिया न्यूज चैनल फरवरी से आनएयर   हो गया था और तभी से न्यूज पत्रकारों से ली जा रही थी. पहली मीटिंग में जोगिन्द्र दलाल जो मालिक हैं, ने 200 …

मजीठिया वेतनमान : वो अपना राजधर्म निभा रहे हैं लेकिन आप?

मोदी सरकार हो या और सरकारें। कुछ प्रेस मालिकों को इसलिए नागदेव के सामन पूजती हैं कि वे उनकी छवि बनाते हैं, नतीजन प्रेस में लेबर लॉ किस बदहाली में है, पत्रकारों के वेज दिलाने की हिम्मत कोई सरकार नहीं कर पाई। यही काम मोदी सरकार भी कर रही है। प्रेस मालिक अपना राजधर्म निभा रहे हैं, सोशल मीडिया में सरकार की आलोचना हो रही है। लेकिन मजीठिया वेतनमान की बात आती हैं तो मोदी सरकार का राजधर्म चीन-भारत युद्ध, काश्मीर विवाद, पाकिस्तान को सबक सिखाने चला जाता है। लेकिन देश के भीतर जिन दुश्मनों को सबक सिखाना है उन्हें नहीं सिखाया जाता। जब आप देश में ठीक से लेबर लॉ लागू नहीं करा पा रहे हैं। कुछ उद्योगपतियों के सामने इतने असहाय हैं तो फिर चीन, पाकिस्तन की क्या बात करते हैं?

अतुल अग्रवाल फिर सुर्खियों में, अबकी उन्हीं के वेब चैनल के पत्रकार ने दी जमकर गालियां (सुनें टेप)

अतुल अग्रवाल अपने कर्मों से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. ताजा मामला ठगी और गाली खाने का है. अपने वेब न्यूज चैनल हिंदी खबर में अतुल अग्रवाल ने यूपी का स्थानीय संपादक अमितेश श्रीवास्तव को बनाया था. अमितेश ने अतुल के कहने पर पैसे भी चैनल में लगाए. अतुल अग्रवाल की फितरत है कि वह …

एनडीटीवी पर यह व्‍यर्थ का हंगामा

लोग सही कहते हैं कि जब प्रभावशाली व्‍यक्‍ति, समूह, संस्‍था किसी निर्णय से प्रभावित होते हैं तो उसका असर दूर तक जाता है, उसके पहले भले ही कई प्रभावित होते रहे हों किंतु उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने एनडीटीवी इंडिया के प्रसारण के पूर्व किसी ओर चैनल के द्वारा गलत जानकारी के सार्वजनिक किए जाने के बाद दण्‍ड स्‍वरूप उस पर रोक न लगाई हो, जिसने की न दिखाने वाली सामग्री का प्रसारण किया है। पर इस बार की बात कुछ ओर है, क्‍यों कि इस बार केंद्र के घेरे में एनडीटीवी आया है, जहां रवीश जैसे श्रेष्‍ठ एंकर हैं और उसे देखनेवाले दर्शक भी देश-दुनिया में बड़ी संख्‍या में मौजूद हैं।

मुझे नहीं लगता NDTV की मोदी सरकार से भिड़ने की हैसियत है

Dilip C Mandal : NDTV आज की तारीख़ में सिर्फ 513 करोड़ रुपए की कंपनी है। उस पर फ़ेमा यानी मनी लॉन्ड्रिंग का 2031 करोड़ रुपए का और टैक्स अदायगी से संबंधित 450 करोड़ रुपए के मामले है। सरकार जिस पल चाहेगी, ऑक्सीजन रोक देगी। लेकिन जेटली जी के होते NDTV का ऑक्सीजन रुकना मुमकिन नहीं लगता। मुझे नहीं लगता NDTV की सरकार से भिड़ने की हैसियत है। NDTV के मालिक प्रणय राय एक्सप्रेस वाले रामनाथ गोयनका नहीं हैं कि घर फूँककर भिड़ जाएँ। जो दिख रहा है, हो सकता है कि हक़ीक़त वह न हो।

एनडीटीवी पर बैन के खिलाफ देश भर से उठने लगी आवाज

DUJ Calls for Protest on NDTV Ban

The Delhi Union of Journalists (DUJ) strongly and unequivocally condemns the one-day ban on NDTV’s Hindi channel, ostensibly for its reporting of the Pathankot airbase attack.  We see no reason for singling out NDTV in this manner when all channels reported the attack in similar fashion.  In a democracy no bureaucratic body such as the Inter-ministerial Committee of the Information & Broadcasting Ministry that issued this order should have such arbitrary powers. Exercise of such power reminds one of the dark days of the Emergency when the media was muzzled and citizens’ freedoms lost.

‘प्रातःकाल’ अखबार में भी उठी मजीठिया की मांग

मुंबई : राजस्थानी समाज में गहरी पैठ रखने वाले मुम्बई के हिंदी दैनिक प्रातःकाल में भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन, एरियर और प्रमोशन की मांग उठी है। यहाँ खबर है कि प्रातःकाल के मुख्य उपसंपादक अश्विनी राय ने भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर 17 (1) का एक रिकवरी क्लेम श्रम आयुक्त कार्यालय महाराष्ट्र में दाखिल किया है। इससे प्रातःकाल प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है।

मोदीजी गोयनका अवार्ड बांटने से पहले इंडियन एक्सप्रेस की ये सच्चाई भी जान लेते…

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की तरफ से मेरा एक सवाल है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से। सवाल पूछने का मुझे दोहरा हक़ है। मोदी जी काशी के सांसद हैं। मैं भी काशी का हूँ और उनका मतदाता भी। रामनाथ गोयनका पुरस्कार वितरण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने में पत्रकारिता की भूमिका अहम है. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर पुरस्‍कार पाने वालों को बधाई दी. उन्‍होंने कहा कि हर किसी की कलम देश को आगे बढ़ाने में योगदान देती है। मैं मोदी जी से पूछना चाहता हूँ जिस इंडियन एक्सप्रेस के दरबार में आपने हाजिरी लगायी क्या यहाँ आने से पहले आपने पूछा इंडियन एक्सप्रेस प्रबंधन से कि आपने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू की, क्या आपने सुप्रीम कोर्ट की बात मानी। 

संस्मरण : ग़ालिब छुटी शराब (भाग 1)

‘ग़ालिब’ छुटी शराब, पर अब भी कभी-कभी
पीता हूँ रोज़े-अब्रो-शबे-माहताब में

13 अप्रैल 1997। बैसाखी का पर्व। पिछले चालीस बरसों से बैसाखी मनाता आ रहा था। वैसे तो हर शब बैसाखी की शब होती थी, मगर तेरह अप्रैल को कुछ ज्यादा ही हो जाती थी। दोपहर को बियर अथवा जिन और शाम को मित्रों के बीच का दौर। मस्‍ती में कभी-कभार भाँगड़ा भी हो जाता और अंत में किसी पंजाबी ढाबे में भोजन, ड्राइवरों के बीच। जेब ने इजाजत दी तो किसी पाँच सितारा होटल में सरसों का साग और मकई की रोटी। इस रोज दोस्‍तों के यहाँ भी दावतें कम न हुई होंगी और ममता ने भी व्‍यंजन पुस्‍तिका पढ़ कर छोले भटूरे कम न बनाए होंगे।

Mumbai Press Club strongly condemns brutal attack on news photographers at Tata House

Arrest culprits in attack on photographers

The Mumbai Press Club strongly condemns brutal attack on news photographers at Tata House, Fort, Mumbai, and demands immediate arrest of security personnel of Tata House, who were involved in a shameful act of violence against the professionals from various media houses who were performing their duty on Friday (November 4, 2016) afternoon. 

एनडीटीवी पर बैन कोई एक दिन का फैसला नहीं

3 मई 2011 को मेरे, मेरे 80 साल के पिता (जो कि केंद्र सरकार से सेवानिवृत कर्मचारी) और मेरे अख़ाबर को छापने वाले प्रिंटर के खिलाफ गाजियाबाद के कई थानों में कई एफआईआर दर्ज करा दीं गईं। साथ ही हमारे हिंदी अख़बार को उत्तर प्रदेश सरकार ने बैन कर दिया। इसके अलावा हमारे घर की बिजली और पानी तक काट दिया गया। जिसके बाद पूरे शहर के बुद्धीजीवि वर्ग ने इसका विरोध किया और सभी राजनीतिक दलों के सम्मानित नेताओं ने सरकार की मनमानी का विरोध किया। चाहे जनाब भारतेंदु शर्मा जी हो या फिर श्री के.सी त्यागी जी या फिर श्री कुंवर अय्यूब अली, इन सभी लोगों ने हमारा न सिर्फ हमारा समर्थन किया बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की मशीनरी को आड़े हाथों लिया।

एनडीटीवी बैन के खिलाफ रवीश के इस ऐतिहासिक प्राइम टाइम को न देख पाएं हों तो अब जरूर देख लें

Om Thanvi : आज रवीश का प्राइम टाइम ‘सवाल पर सवाल है’ ऐतिहासिक था। उस रोज़ की तरह, जब उन्होंने स्क्रीन को स्वेछा से काला किया था, अभिव्यक्ति के संसार में पसरे अंधेरे को बयान करने के लिए। आज उन्होंने हवा में व्याप्त ज़हर के बहाने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हो रहे प्रहार को दो मूकाभिनय के कलाकारों से ‘सम्वाद’ के ज़रिए चित्रित किया। बहुत मार्मिक ढंग से।

एनडीटीवी को सरकारी प्रतिबन्ध की बधाई

Sanjaya Kumar Singh : एनडीटीवी पर कार्रवाई की खबर से मुझे आम आदमी पार्टी के सासंद भगवंत मान पर संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप और फिर मान के आरोप की याद आई। पता नहीं अब यह मामला किस स्थिति में है पर “सैंया भये कोतवाल” ऐसे ही नहीं कहा जाता है। संसद की साइट पर संसद भवन का वर्चुअल लिंक दिख तो अब भी रहा है पर चल नहीं रहा। चूंकि संसद देखा हुआ है इसलिए वर्चुअल लिंक देखने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई। संसद का वीडियो लोड करने के लिए जब मान का मामला गर्माया तो मैंने देखना चाहा कि अधिकृत तौर पर क्या दिखाया जा रहा है और मान ने क्या दिखा दिया। पर उस दिन से वह लिंक चल ही नहीं रहा है। काफी दिन हो गए। आज याद आया तो सोचा फिर देखा जाए। पर उसे चलाने, लगाने, हटाने वाले भी, लगता है, भूल गए। वैसे ही है। ना हटा है, ना चल रहा है। फिलहाल, एनडीटीवी मामले में मुझे यकीन है कि वह इस कार्रवाई से और मजबूत होगा। उसका समर्थन बढ़ेगा। अगर ऐसे प्रतिबंधों से डरना होता तो वह ऐसा कुछ करता ही क्यों जिससे मिर्ची लगती है।

राजकमल झा, आपने इस भाषण के जरिए सम्पादक नाम की संस्था के मान की न केवल रक्षा की है, बल्कि उसे बढ़ाया भी है

Satyanand Nirupam : किसी सम्पादक के विवेक, समय पर उसकी अचूक पकड़ के साथ उसकी निर्णय-क्षमता की धार देखनी हो तो इस लिंक पर जाकर इंडियन एक्सप्रेस अखबार के प्रधान सम्पादक राजकमल झा का छोटा-सा लेकिन महत्वपूर्ण भाषण सुनिए जो उन्होंने अपने संस्थान द्वारा दिए जाने वाले रामनाथ गोयनका अवार्ड के समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दिया…

उन्हें सुदर्शन टीवी की गटर छाप पत्रकारिता से दिक्कत नहीं, बस एनडीटीवी इंडिया के अस्तित्व से बड़ी समस्या है

Sheetal P Singh : ये कहाँ आ गये हम…  जिन्हें सुदर्शन टीवी (जिसके मालिक/ संपादक पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है) जो अनवरत सांप्रदायिक प्रचार करता है, नाबालिग़ लड़की से बलात्कार करने के आरोप में बंद आसाराम का खुला समर्थन करता है । भाषा / कंटेंट के मामले में गटर पत्रकारिता का नमूना है से बाल भर भी आपत्ति न है न हुई न होगी उनके तरकश में NDTV इंडिया के खिलाफ भाखने को बहुत कुछ है! जिन्हें Znews के संपादक / प्रबन्धक / मालिक को वीडियोटेप पर नवीन जिन्दल से सौ करोड़ का ब्लैकमेल करते देखने से रत्ती भर भी फ़र्क़ न पड़ा वे पत्रकारिता की शुचिता की तलाश में NDTV इंडिया की कमियाँ गिना रहे हैं! जिन्हें संपूर्ण मीडिया के नरेंद्र मोदी अमित शाह अरुण जेटली मुकेश अंबानी गौतम अडानी से संबंधित हर ऐसे समाचार जिसमें आलोचना हो पर अघोषित प्रतिबंध से हर्फ़ भर भी दिक़्क़त नहीं है उन्हे NDTV इंडिया के अस्तित्व से ही बड़ी दिक़्क़त है! इन सब को पहचानिये! इनकी जात पहचानिये! ये एक रंग के हैं, इनका रंग पहचानिये!

मोदी अगर एनडीटीवी को ठिकाने लगाने पर आ जाएंगे तो एक दिन का नहीं, पूरा ही ब्लैक आउट करा देंगे

Rajat Amarnath : NDTV जहाँ नौकरी पाने का पैमाना होता था कि आपके परिवार में कौन कौन ब्यूरोक्रेसी में हैं ताकि ख़बर के साथ साथ आड़े वक्त पर चैनल का काम निकाल सकें सरकार बदली तो काम निकालने वाले ब्यूरोक्रेट्स भी बदल गए डॉक्टर राय खुद कांग्रेसी हैं इसलिए उन्हीं के समय मे पनपे हैं उनकी पत्नी राधिका राय की बहन हैं वृंदा करात और बहनोई हैं प्रकाश करात जो वामपंथी हैं ये जगजाहिर है ऐसे में ये चैनल सरकारी पक्ष की तो बात करने से रहा और अब जब सरकार ने बाकी चैनलों को बख्श दिया लेकिन NDTV को एक दिन के लिए ब्लैक आउट करने का आदेश दिया तो छटपटाहट शुरू हो गई. अब इसे अघोषित आपातकाल बताया जा रहा है.  

रिपोर्टर ने आरई को दी मात!

अजमेर। राजस्थान पत्रिका के एक रिपोर्टर ने राजनीति की बिसात पर अपने ही आरई को मात दे दी है। मामला यह है कि इस रिपोर्टर की अपने आरई से बिलकुल पटरी नहीं बैठ रही। आरई उपेन्द्र शर्मा ने अपने आकाओं से कहकर रिपोर्टर का तबादला सीमावर्ती बाड़मेर में करा दिया।

सौमित्र बोस, कुणाल प्रधान और इप्शित महापात्रा ने एचटी के साथ नई पारी की शुरुआत की

हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स अखबार में तीन पत्रकारों सौमित्र बोस, कुणाल प्रधान और इप्शित महापात्रा ने नई पारी की शुरुआत की है. कुणाल बोस एनडीटीवी डॉट कॉम’ में एक्जीक्‍यूटिव एडिटर थे. वे स्‍पोर्ट्स की खबरें देखा करते थे. एचटी में उन्होंने नेशनल स्‍पोर्ट्स एडिटर के रूप में ज्वाइन किया है. अभी तक एचटी की स्‍पोर्ट्स टीम का नेतृत्‍व कर रहे सुखवंत बसरा को स्‍पोर्ट्स एडिटर (स्‍पेशल प्रोजेक्‍ट्स) की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस के संपादक का प्रधानमंत्री के सामने दिया गया भाषण मीडिया जगत में हुआ वायरल

“रामनाथ गोयनका” पुरस्कार के मौक़े पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते समय indian Express के संपादक राजकमल झा द्वारा दिया गया भाषण मीडिया जगत में वायरल हो रहा है. अंग्रेजी में दिए गए लेक्चर का हिंदी अनुवाद यहां पेश है :

प्रश्नों पर जब प्रतिबंध लगे तब दुगुने वेग से दागने चाहिये सवाल (कविता)

प्रश्नकाल

-भंवर मेघवंशी-

प्रश्नों पर जब प्रतिबंध लगे
तब दुगुने वेग से
दागने चाहिये सवाल
सवाल,सवाल और सवाल
अनगिनत ,अनवरत
प्रश्न ही प्रश्न पूछे जाने चाहिये
तभी यह अघोषित आपातकाल
प्रश्नकाल में बदल सकता है.

छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… अगर छेद दिखाए गए तो बैन कर दिया जाता है…

सच को सच कह दिया था इसी पर मेरे पीछे ज़माना पड़ा है… इस ज़माने में सिर्फ वो सरकार है जिसे सवाल पसंद नहीं, और कुछ भक्तों की संख्या है जिनकी आंखें फूट चुकी हैं.. छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… और अगर छेद दिखाए गए… तो बैन कर दिया जाता है… 2014 से 2019 तक के बीच के लोगों को खुद को महान समझना चाहिए… क्योंकि उन्हें दोबारा हिटलर को देखने का मौक़ा मिल रहा है… हमें कोरिया जाने की ज़रूरत नहीं है… क्योंकि एक ‘किम जोंग’ हमारे देश में भी फल-फूल रहा है… उसे सवाल पसंद नहीं है, उसे मन की करनी है, उसे किसी की नहीं सुननी है… रावण जैसा अहंकार, बकासुर जैसी सोच, कंस जैसी क्रूरता उसके भीतर कूट-कूट कर भरी है…

सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी चैनल को खत्म करो!

गले में बाँधे रहते थे, अब मुँह पर पट्टा बाँधे हैं,
पालतू हैं हम मोदी के, इस बात का गंडा बाँधे हैं।
सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी को खत्म करो,
झूठ के भोपू वाले हैं, हम झूठ का दामन थामे हैं।

ये पंक्तियाँ उन चंद तथाकथित बिकाऊ पत्रकारों की भावनाओं की कल्पना है जिन्हें कोई अंध भक्त कहता है, कोई सरकार के झूठ का भोंपू तो कोई मोदी का पालतू। आजाद पत्रकारिता और निष्पक्ष कलम जब सरकार की गलत नीतियों का बखान करने लगता है तो पालतू गला फाड़-फाड़ कर भोंकते हैं। सरकार की मुखालिफत पर ये अक्सर काट भी लेते हैं। लेकिन इनके काटने से पीड़ितों को ना इन्जेक्शन लगवाना पड़ता है और न ही जान का खतरा महसूस होता है। मेडिकल साइंस कहती है कि काटने वाला जब तक जीवित है तब तक पीड़ित खतरे से बाहर है। अभी तीन साल तक इन्हे चंद टुकड़ों की ताकत जिन्दा रखेगी और सत्ता की ताकत इन्हेँ झूठ का साथ देने की आब-ए-हयात देती रहेगी। झूठ की हिफाजत के लिये निष्पक्ष पत्रकारिता पर जो भौकते रहते है उनका मोदी सरकार की दमनकारी नीतियों पर खामोश रहना स्वाभाविक भी है।

यूपी के जंगलराज में छेड़छाड़ से डरी रेडियो जॉकी ने लाइव प्रोग्राम में इस्तीफे का ऐलान किया

यूपी के जंगलराज में महिलाएं किस कदर असुरक्षित हैं, इसका वाकया इलाहाबाद में देखने को मिला जब मनचलों ने रेडियो जाकी को सरेआम पॉश इलाके की सड़क पर छेड़ा. घटना से डरी आरजे ने रेडियो पर लाइव कार्यक्रम के दौरान ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. इलाहाबाद में छेड़खानी और मनचलों से परेशान 93.5 एफएम की आरजे निधि के प्रोग्राम में लाइव ही इस्तीफा देने से हड़कंप मच गया. बाद में लोगों की अपील पर आरजे ने फैसला बदला और नौकरी जारी रखने की जानकारी अपने एफबी पेज पर अपडेट की है.

सहारा मीडिया से रणविजय सिंह को टर्मिनेट किए जाने की खबर!

सहारा मीडिया से एक बड़ी सूचना है कि दशकों से वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे रणविजय सिंह को प्रबंधन ने टर्मिनेट कर दिया है. उन्हें काफी समय से अधिकार विहीन कर साइडलाइन कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि रणविजय सिंह पर कई किस्म के आरोप थे जिसमें पद का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण करना भी शामिल है. उन पर अवैध संपत्ति बनाने और आर्थिक भ्रष्टाचार करने के भी आरोप हैं. उनको लेकर सहारा में आंतरिक जांच कराई गई जिसमें वह सहारा मीडिया के लिए अयोग्य पाये गये. उन पर स्टाफ में असंतोष को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय के खासमखास ओपी श्रीवास्तव उनसे इन दिनों सख्त नाखुश थे. चर्चा है कि तीन चार बड़े विकेट और गिरेंगे बहुत ज़ल्द. उधर, रणविजय खुद यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें टर्मिनेट नहीं किया गया, बल्कि वह खुद हटे हैं. 

एबीपी न्यूज के सीईओ पद से अशोक वेंकटरमणी ने दिया इस्तीफा, अविनाश पांडेय का कद बढ़ा

एबीपी न्यूज चैनल के सीईओ पद से अशोक वेंकटरमणी ने इस्तीफा दे दिया. चर्चा है कि अशोक वेंकटरमणणी नई पारी शुरुआत जल्द करेंगे. अशोक निजी टीवी न्यूज चैनलों की संस्था एनबीए यानि ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स असोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं. वेंकटरमणी अपने करियर में कई कारपोरेट कंपनियों में बिजनेस, सेल्स, मार्केटिंग और जनरल मैनेजमेंट के काम देखते हुए एबीपी न्यूज के ग्रपु सीईओ तक के पद तक पहुंचे थे.

ये तीन तरह के लोग एनडीटीवी पर बैन के खतरनाक फैसले को नहीं समझ पाएंगे

Nitin Thakur : एनडीटीवी इंडिया पर बंदिश का फैसला कितना खतरनाक है, ये बात तीन तरह के लोगों की समझ में नहीं आएगी।  1. वो जिन्होंने मजबूरी में पत्रकारिता के पेशे को अपनाया है। 2. किसी और एजेंडे को पूरा करने के लिए इस पेशे में घुस आए लोग। 3. ग्लैमर से अंधे होकर पत्रकारिता की गलियों में आवारगर्दी कर रहे पत्रकार जैसे दिखनेवाले लोग। इनके लिए रिपोर्टिंग करते किसी पत्रकार का पिटना हास्य का विषय है। किसी पत्रकार या पत्रकारिता संस्थान पर चलनेवाले सरकारी डंडे को ये इज़्ज़त देते हैं। दरअसल इन्हें अपने पेशे पर शर्म है लेकिन ये लोग इस पेशे के लिए खुद शर्म का विषय हैं।

‘सुदर्शन न्यूज’ के मालिक सुरेश चव्हाणके ने अपने चैनल की महिला मीडियाकर्मी को धमकाया (सुनें टेप)

आरोपी चैनल मालिक सुरेश चौव्हाणके.

सुनिए एक एक्सक्लूसिव टेप। सुदर्शन चैनल का मालिक सुरेश चव्हाणके ने अपने चैनल की जिस महिला मीडियाकर्मी का यौन शोषण किया, उस महिला को धमकाते हुए कहा कि जो करना हो करो, वह कुछ न बिगाड़ पाएगी। यहाँ तक बोला कि प्रेस कांफ्रेंस कर लो, कुछ न होगा। यानि चव्हाणके को मालूम है कि चैनल मालिक होने के कारण मीडिया वाले उसके खिलाफ कवरेज करेंगे नहीं, इसलिए उसका बाल तक बांका न होगा। बस वह यह भूल गया कि मीडिया में एक भड़ास4मीडिया भी है जो मीडिया का बाप है।

यूपी में जंगलराज : धरना देने पर पुलिस वाले पीटते रहे, लड़के इंकलाब जिंदाबाद बोलते रहे (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : ये वीडियो अंग्रेजों के जमाने का नहीं है. आज की तारीख का है. पुलिस वाले पीटे जा रहे हैं और ये नौजवान इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं. इनका अपराध बस इतना है कि इन्होंने भोपाल में आठ लोगों को फर्जी मुठभेड़ में मार दिए जाने के घटनाक्रम का विरोध करते हुए न्यायिक जांच की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे. ढेर सारे पुलिस वाले आए और बिना चेतावनी दिए माइक दरी छीन झपट कब्जे में लेकर युवकों को पीटना शुरू कर दिया.

सुदर्शन चैनल के मालिक की केबिन में खुफिया बेडरूम (देखें वीडियो)

यौन शोषण के आरोप में फंसे सुदर्शन न्यूज चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके अपने आफिस में एक खुफिया बेडरूम रखते हैं ताकि रासलीला रचाकर लिंग पूजन करा सकें. जो लोग सुदर्शन चैनल के सीएमडी सुरेश चह्वाणके से मिलने चैनल के आफिस में बनी उनकी बड़ी सी केबिन में गए होंगे उन्हें तनिक भी पता न चला होगा कि उसी केबिन में एक सीक्रेट बेडरूम का दरवाजा है जिसका इंटीरियर कुछ यूं बनवाया गया है कि किसी को इसके होने का एहसास ही नहीं हो सकता.

अर्णब गोस्वामी के बारे में इस पत्रकार ने जून महीने में ही कर दी थी भविष्यवाणी

adim S. Akhter : अर्णब गोस्वामी के बारे में इस साल जून में की गई इसे मेरी भविष्यवाणी कहिए या आशंका, पर ये सच साबित हुई। तब मैंने अपने विश्लेषण में कहा था कि पीएम मोदी के सॉफ्ट इंटरव्यू के बाद अर्णब और टाइम्स नाउ की जो छीछालेदर हुई है, उन हालात में अर्णब की जल्द ही टाइम्स नाउ से विदाई हो सकती है। और कल ही अर्णब की टाटा-बाय बाय वाली खबर आ गई। और जो लोग ये चिंता कर रहे हैं कि अर्णब के बिना टाइम्स नाऊ का क्या होगा, उनके टनाटन न्यूज़ ऑवर डिबेट का क्या होगा, टाइम्स नाऊ की टीआरपी का क्या होगा, वो ज़रा धीरज रखें। मैंने लिखा था कि आज के ज़माने में टाइम्स ग्रुप कभी संपादकों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देता। उनका फंडा अलग है। जो लोग टाइम्स ग्रुप में काम कर चुके हैं और जिनका थोड़ा बहुत भी मैनेजमेंट से वास्ता रहा है, वो ये बात बखूबी जानते हैं।

टाइम्स की दुकान और पत्रकार से छुटकारा

अर्नब गोस्वामी ने टाइम्स नाऊ क्यों छोड़ा, वे जानें। पर जैसा कि नौकरी छोड़ने वाले ज्यादातर पत्रकारों के साथ होता है, नौकरी छोड़ने के समय हर कोई कहता है, अपना कुछ काम करेंगे। ऐसा कई पत्रकारों के मामले में हुआ है। कई साल से हो रहा है। किसी एक का क्या नाम लेना – लोग जानते हैं और जो नहीं जानते उनके लिए नाम बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। वैसे यह सच है कि नौकरी छोड़ने के बाद कइयों ने अपना काम शुरू भी किया, कर भी रहे हैं पर ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि जैसी संस्था छोड़ी वैसी ही खड़ी कर ली। या जो है वैसी होने की ओर अग्रसर है। फिर भी अर्नब गोस्वामी के बारे में कहा जा रहा है (उन्होंने नहीं कहा है) कि वे चैनल शुरू करेंगे। और फिर इससे जुड़ी अटकलें। मेरी दिलचस्पी उसमें नहीं है।

रिसेप्शनिस्ट ने डीबी कॉर्प की सहायक महाप्रबंधक को श्रम विभाग में तलब कराया

मुंबई : मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर डी बी कॉर्प के मुम्बई ऑफिस में कार्यरत महिला रिलेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का ट्रांसफर सोलापुर कर दिया गया था। लतिका ने इस मामले की शिकायत श्रम आयुक्त कार्यालय मुम्बई में लिखित रूप से कर दी। लतिका की इस शिकायत पर श्रम आयुक्त कार्यालय की सरकारी कामगार अधिकारी निशा नागराले ने डी बी कॉर्प प्रबंधन को नोटिस भेजा।

करप्शन के आरोपों के कारण चार महीने में ही वापस बुलाए गए नीरज गुप्ता और अवनींद्र कमल

दैनिक जागरण मेरठ से सूचना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चार महीने में ही नीरज गुप्ता को बुलंदशहर से और अवनींद्र कमल को शामली से वापस मेरठ बुला लिया गया है. ये लोग ब्यूरो चीफ की हैसियत से इन जिलों में कार्यरत थे. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन के पास इन लोगों की करतूतों के कुछ प्रमाण पहुंचाए गए. इसी के बाद इन्हें फौरन वापस बुलाने का फैसला हुआ. बताया जा रहा है कि लोकेश पंडित और प्रवीण वशिष्ट को इन जिलों का चार्ज सौंपा गया है.

NEW CONTENT ACQUISITION SCHEME : DOORDARSHAN INVITES FRESH AND INNOVATIVE PROGRAMME IDEAS

Doordarshan has been exploring new ways of procuring best quality content for its channels. Towards this a “New Content Acquisition Scheme” through bidding process for DD Channels has been approved by Prasar Bharati Board. DD has floated a RFP document with several flexible eligibility conditions to invite fresh and good quality content on its DD National as a pilot.

धरना दे रहे रिहाई मंच के नेताओं को लखनऊ पुलिस ने जमकर पीटा (देखें वीडियो)

लखनऊ 3 नवम्बर 2016। 8 लोगों को फर्जी मुठभेड़ में मारने की घटना के खिलाफ यहां धरने पर बैठे ‘रिहाई मंच’ के नेताओं राजीव यादव और शकील कुरैशी को पुलिस ने जमकर पीटाा। रिहाई मंच की तरफ से कहा गया कि उनके नेताओं को पुलिस ने एनकाउंटर में मारने की धमकी दी और बर्बर पिटाई की जो अखिलेश राज में लोकतंत्र की हत्या का ताजा उदाहरण बताया है। पुलिस ने धरने स्थल से बैनर फाड़ते हुए माइक, बैट्री आदि उठा ले गई। मंच इस मुद्दे पर प्रदेश व्यापी आंदोलन चलाकर जनता के बीच इस इंसाफ विरोधी सरकार को बेनकाब करेगा। मंच ने हमलावर पुलिस कर्मियों को तत्काल निलम्बित करने की मांग की है।

यौन उत्पीड़न के आरोपी सुदर्शन चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज

अपने चैनल की वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी के यौन शोषण और उत्पीड़न के मामले में नोएडा पुलिस ने करीब दस दिन की देरी के बाद अंतत: एफआईआर दर्ज कर लिया है. महिला मीडियाकर्मी द्वारा लिखित कंप्लेन दिए जाने के बाद नोएडा के एसएसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने एसपी सिटी दिनेश यादव को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था. एसपी सिटी ने सुरेश चव्हाणके को आफिस तलब किया और करीब छह घंटे तक बिठाकर पूछताछ की. एसपी सिटी ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर एसएसपी को दी जिसके बाद प्रथम दृष्टया आरोपों को सच देखते हुए एसएसपी ने मुकदमा लिखने का आदेश कर दिया. एफआईआर में आसाराम के बेटे नारायण साईं को भी आरोपी बनाया गया है.

TRIPLE TALAQ AND THE UNIFORM CIVIL CODE

National Federation for Indian Women [NFIW] from its very inception (1954) upholds the Indian Constitution which defines India as a sovereign,  democratic and secular state. It guarantees that every citizen lives with dignity and enjoys equality. All women are discriminated against by Personal Laws of all Religions. If Muslim clergy allows Talaq in one sitting, the Roman Catholic clergy can annul a marriage on a unilateral basis irrespective of when it had taken place and the Hindu men can abandon their wives without divorcing her and there are so many such examples where only the woman is discriminated against.

मोदी के हाथों पुरस्कार लेने से मना करने वाले पत्रकार अक्षय मुकुल से सेल्फी पत्रकारों को शायद कुछ शर्म आए

Sanjay Kumar Singh : सुधीर चौधरी को रामनाथ गोयनका पुरस्कार देकर एक्सप्रेस के कर्ता-धर्ताओं ने रामनाथ गोयनका, उनके नाम पर दिए जाने वाले पुरस्कार और पत्रकारिता का जो अपमान किया था उसकी भरपाई पत्रकार और लेखक अक्षय मुकुल को उनकी किताब ‘गीता प्रेस एंड मेकिंग ऑफ हिंदू इंडिया’ को गोयनका देकर पूरी कर दी। रही-सही कसर अक्षय मुकुल ने नरेंद्र मोदी के हाथों पुरस्कार लेने से मना करके पूरी कर दी।

सुदर्शन न्यूज चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके पर यौन शोषण का आरोप

पीड़िता चैनल में लंबे समय से कार्य कर रही.. नोएडा पुलिस को दी लिखित कंप्लेन… कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने दर्ज नहीं किया एफआईआर… 

एक बड़ी खबर खुद को प्रखर राष्ट्रवादी बताने वाले न्यूज चैनल ‘सुदर्शन न्यूज’ से आ रही है. इस चैनल में काम करने वाली एक महिला मीडियाकर्मी ने चैनल के मालिक सुरेश चह्वाणके पर यौन शोषण का आरोप लगाया है. महिला मीडियाकर्मी ने नोएडा के सेक्टर छह थाने में लिखित तहरीर दी है लेकिन नोएडा पुलिस न जाने किस दबाव में न तो एफआईआर दर्ज कर रही है और न ही आरोपी चैनल मालिक को गिरफ्तार कर रही है.

इन अखबारों और चैनलों ने नहीं दिया अपने कर्मचारियों को बोनस

मुंबई : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के तहत मीडियाकर्मियों का जितना एरियर बना, उसे डकार चुके कई अखबारों के मालिकों ने अब अपनी कई यूनिटों में कर्मचारियों का बोनस का पैसा भी हजम कर लिया और उन्हें एक ढेला तक बोनस के नाम पर नहीं दिया। बोनस न देने वालों में कुछ चैनलों का नाम भी सामने आ रहा है जिनमें टाइम्स नाऊ और इंडिया न्यूज़ भी शामिल है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक टाइम्स नाऊ और जूम ने मुम्बई के अपने कर्मचारियों को इस बार दीपावली पर बोनस नहीं दिया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से खबर है कि यहाँ इंडिया न्यूज़ ने अपने कर्मचारियों को बोनस नहीं दिया।

‘नेशनल दस्तक’ ने इन तीन पत्रकारों को दिया दिवाली का ‘बंपर गिफ्ट’!

नेशनल दस्तक नामक वेब पोर्टल ने अपने यहां काम करने वाले तीन पत्रकारों को नोटिस थमाकर दिवाली का ‘बंपर गिफ्ट’ दिया है। पत्रकार हेमराज, ओमदेव और नीलेंद को नोटिस थमाया गया है। बताया जा रहा है कि पोर्टल के संपादक शंभू कुमार सिंह की वजह से इन तीनों पत्रकारों को नोटिस थमाया गया है। शंभू कुमार सिंह की वजह से पहले भी कई पत्रकार ‘नेशनल दस्तक’ छोड़कर जा चुके हैं।

टाइम्स नाऊ से अरनब गोस्वामी ने इस्तीफा दिया, खुद का चैनल लांच करेंगे

मीडिया इंडस्ट्री की एक बड़ी खबर सामने आ रही है. टाइम्स नाऊ न्यूज चैनल के चर्चित एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने संपादकीय विभाग की बैठक में अपने इस्तीफे का ऐलान किया. बताया जा रहा है कि अर्णब जल्द ही अपना न्यूज चैनल लांच करेंगे. टाइम्‍स नाऊ चैनल का मालिक टाइम्स आफ इंडिया अखबार समूह है जिसके मालिक विनीत जैन और समीर जैन हैं.