आज के अखबारों में शीर्षक से आगे क्या पढ़ना

वैसे तो चुनाव नतीजों पर टिप्पणी करना जनता की कार्रवाई के बारे में जनता को ही बताना है। असल में यह अखबारों द्वारा राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर जनता को वर्षों – महीनों तक दी गई (या नहीं दी गई) सूचनाओं पर प्रतिक्रिया होती है लेकिन अखबारों में उसपर अटकल लगाने का काम भी खूब …

बिना शीर्षक के अखबार और खबर

आज चुनाव परिणाम का दिन है। रिवाज रहा है शीर्षक में जीत और हार के कारण बताने का। ईमानदारी से कहूं तो उत्तर प्रदेश की जीत अगर नोटबंदी की ‘सफलता’ थी और बिहार में अंतरात्मा की आवाज पर सरकार बदल गई और बहुमत मिलने का मतलब नोटबंदी तथा जीएसटी है तो पाठकों या मतदाताओं को …

सरकार आरएसएस का एजंडा लागू कर रही है, सामाजिक न्याय का नहीं

आज के अखबारों में आपको क्या कहीं ऐसा कोई शीर्षक मिला? केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह ने इस्तीफा दे दिया है। इस खबर का शीर्षक यही हो सकता है और दूसरा यह भी कि केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार आरएसएस का एजंडा लागू कर रही है, इस्तीफा दिया या सरकार सामाजिक न्याय के एजंडे …

क्या आपके अखबार ने आपको नोटबंदी पर जानकारों की राय बताई?

आज के अखबारों में विश्व हिन्दू परिषद की रैली छाई हुई है। मेरा मानना है कि खबर छपती है इसलिए रैली होती है और रैली होती है इसलिए खबर छपती है। और पहले खबर छपवाने वालों का स्वार्थ होता था अब छापने वालों का भी होता है तो ऐसी खबरें प्रमुखता से छपती हैं। आज …

हर चुनाव के बाद थोड़ा सा संविधान नष्ट कर दिया जाता है !!

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम अपने साप्ताहिक कॉलम में इस बार चुनाव जीतने के लिए संवैधानिक मूल्यों से समझौता करने और मीडिया की हालत बताने के साथ यह सवाल उठाया है कि क्या चुनावों के बाद संवैधानिक मूल्य बचे रहेंगे? इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हमें अपने आप …

आपके अखबार ने सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले फौजी की राय आपको बताई?

उन्होंने कहा है, “सर्जिकल स्ट्राइक गोपनीय तरीके से हुआ था, इसे राज ही रखते तो बेहतर होता” सर्जिकल स्ट्राइक याद है? संभवतः पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने उस पर अपना 56 ईंची सीना ठोंका था और इसका राजनीतिक उपयोग किया था। उस समय इस चर्चा के पक्ष-विपक्ष में जो कहा गया और अखबारों में जो …

गोमूत्र पीकर डायबिटीज ‘ठीक’ कर चुके गडकरी बेहोश क्यों हुए?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को एक दीक्षांत समारोह के दौरान मंच पर बेहोश हो गए। हालांकि वे जल्दी ही ठीक हो गए। और बाद में सब कुछ ठीक होने का दावा किया। लेकिन किसी मंत्री का मंच पर बेहोश हो जाना स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण घटना है और मंत्री के साथ ऐसा हो सकता है …

उपेन्द्र राय मामले में सीबीआई को उड्डयन मंत्रालय ने अपने अधिकारी पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सीबीआई को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी (बीसीएएस) के एक कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से मना कर दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो के लिए यह एक झटका है। जांच एजेंसी ने इस कर्मचारी को गिरफ्तार कर चार्जशीट किया था। इस पर पत्रकार उपेन्द्र राय को एयरपोर्ट एंट्री …

सुप्रीम कोर्ट के बहाने सरकार को तेवर दिखाते हिन्दी अखबार

बुलंदशहर की घटना अखबारों में खूब छपने के बाद अब कम छप रही है। आज अंग्रेजी अखबारों में घटना से संबंधित कई खबरें हैं पर हिन्दी में मुख्य रूप से सरकारी खबर है या कुछ नहीं है। दूसरी ओर, सीबीआई विवाद आज हिन्दी के कई अखबारों में लीड है। मैंने पहले भी लिखा है कि …

बुलंदशहर की इन खबरों से अपने अखबार की निष्पक्षता जांचिए, नापिए

बुलंदशहर हिंसा का मामला उलझ रहा है। साजिश की बू आने लगी है। कल मैंने लिखा था कि ऐसा कुछ हिन्दी अखबारों में नहीं है और फालतू की बेमतलब सूचनाएं दी गई थीं। आज यह घटना ज्यादातर हिन्दी अखबारों के पहले पन्ने से हट गई है या छोटी हो गई है। इसलिए, आज मैं अखबारों …

बुलंदशहर : लीड फॉलो करने की बजाय बेमतलब सूचनाओं की भरमार

आज के अखबारों में भी बुलंदशहर की घटना ही छाई हुई है। आइए देखें कि सांप्रदायिक तनाव और उच्च राजनीतिक तापमान की स्थिति में यह फॉलो अप कैसा है। सबसे पहले द टेलीग्राफ। खबर पहले पेज पर लीड है। शीर्षक का अनुवाद मोटे तौर पर इस तरह होगा, “साजिश का आरोप मजबूत हुआ, भूमि मालिक …

दिल्ली में किसान मार्च का गुस्सा ऐसे निकला… ‘मोदीज नोज इन नेहरूज रोज’

आपको अपने अखबार में ये खबर दिखी क्या? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को जोधपुर में एक रैली में कहा, “ये गुलाब का फूल लगा करके घूमने वाले लोगों को बगीचे का ध्यान था, उनको खेतों का कोई ज्ञान नहीं था, उनको किसान के पसीने का ज्ञान नहीं था।” कृपया हमें अनुसरण करें और हमें …

देखिए, आपका अखबार आपको भड़का तो नहीं रहा है

आज के अखबारों में कल बुलंदशहर में हिंसा और पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह तथा एक ग्रामीण युवक की मौत की खबर ही सबसे प्रमुख होनी थी। अखबारों ने इस खबर को जो प्रमुखता दी है उससे भी मानना पड़ेगा कि सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली खबर यही है। मेंने कई अखबारों की खबरें पढ़कर …

काश, आज ऐसी एक-एक खबर हर अखबार में होती !!

आज इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव खबर। यह खबर किसी और अखबार में होनी नहीं है। इसलिए आज दूसरे अखबारों की कोई चर्चा नहीं। इस खबर के बहाने एक्सक्लूसिव खबरें कैसे होती हैं और अखबारो में आमतौर पर कैसी खबरें छपती हैं उसकी चर्चा। इंडियन एक्सप्रेस ने आज पांच कॉलम में नीरव मोदी घोटाले से जुड़ी …

ईवीएम की शिकायत नभाटा ने विज्ञापनों के बीच ऐसे छापी है

देश में तमाम संवैधानिक संस्थाओं की साख जब लगातार खराब हो रही है तब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बहुत मामूली चीज है। यह अकेली भी नहीं है। इसकी साख चुनाव आयोग से जुड़ी हुई है। लेकिन करीब आते लोकसभा चुनावों और उसके सेमी फाइनल कहे गए मध्य प्रदेश चुनाव में ईवीएम पर उठे सवालों को गंभीरता …

किसान नहीं, विपक्षी एकजुटता की खबर अखबारों में पहले पन्ने पर पहुंची

किसानों के मंच पर विपक्षी नेताओं के जुटने से ही सही, उनकी खबर अंग्रेजी अखबारों में तो पहले पन्ने पर आ गई। लेकिन हिन्दी अखबारों में कई अभी भी इसे दिल्ली की स्थानीय खबर ही मान रहे हैं। किसानों की मांग और किसान नेता पहले पन्ने पर नहीं के बराबर है। कुल मिलाकर, किसानों का …

दिल्ली में किसानों की चौथी दस्तक, मांगें अभी पहले पन्ने पर नहीं पहुंचीं

दिल्ली में आज किसानों की रैली है और देश भर के किसान दिल्ली पहुंच गए हैं। आज संसद मार्च करेंगे। उनकी मांग है कि संसद का एक विशेष सत्र बुलाकर उनका मांग पूरी की जाए। इसमें फसल का वाजिब मूल्य, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत का डेढ़ गुना करना, कर्जे माफ करना और …

ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों को महत्व नहीं दिया अखबारों ने

मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए राज्य के 52 जिलों में बुधवार को मतदान हुआ। मतदान मिजोरम में भी हुआ। वहां की खबर वैसे ही कम है। लेकिन मध्यप्रदेश में के कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत थी। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और प्रचार अभियान के प्रमुख ज्योतिरादित्य …

बयान एक, शीर्षक परस्पर विरोधी : फंस गए, सब कुछ बता दिया

ग्वालियर के आईटीएम यूनिवर्सिटी में पिछले शनिवार यानी 24 नवंबर को जम्मू व कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जो कहा वह आज बुधवार यानी 28 नवंबर के कई अखबारों में पहले पन्ने पर है। शनिवार को क्यों नहीं छपा यह अलग मुद्दा है। वह भी शायद बाद में मालूम हो। पर फिलहाल तो आज …

राहुल गांधी का गोत्र बताने वाली खबर पहले पन्ने पर!!

मंदिर और धर्म की घटिया राजनीति करने वाले सत्ता में आए तो मंदिर बनाना भूल गए और जनेऊ व गोत्र पर उतर आए। इसका विरोध करने की बजाय मीडिया ने ऐसे सवालों को हवा दी और जिसे राजनीति करनी है वो तो जवाब देगा ही। लिजाहा जनेऊ, मानसरोवर के बाद राहुल गांधी ने अपना गोत्र …

मंदिर का बवाल, प्रधानमंत्री का आरोप – बन गया शीर्षक !!

धर्मसभा की खबर बहुत हुई। चुनाव से पहले ऐसे आयोजन का मकसद आप जानते हैं। खबरों से यह दिखाई पड़ रहा है कि सरकार और प्रधानमंत्री पर मंदिर बनवाने के लिए दबाव है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलवर की एक रैली में कल (रविवार, 25 नवंबर 2018) को इस मामले में अपना पक्ष रखा और …

‘भैयों’ ने अयोध्या में शिवसैनिकों का कैसा स्वागत किया, इस पर शांत हैं अखबार

आज कोई समस्या नहीं रही। 2019 के लोकसभा चुनाव या पूर्ण बहुमत वाली देश की पहली भाजपा सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले अयोध्या में राम मंदिर बनाने की वर्षों पुरानी मांग (1992 में विवादित ढांचा गिरा दिए जाने के बाद से राम लल्ला तंबू में हैं) को फिर से गर्माने की कोशिशों में …

खबर वही जो शीर्षक से खींचे और आज इसमें दैनिक जागरण का जवाब नहीं

आज कौन सी खबर की चर्चा की जाए यह तय करना थोड़ा मुश्किल रहा। मैंने सबसे पहले हिन्दुस्तान टाइम्स देखा फिर इंडियन एक्सप्रेस और उसके बाद द टेलीग्राफ। तीनों के पहले पेज पर ऐसी कोई खबर नहीं दिखी जो सभी अखबारों में हो और शीर्षक व प्रस्तुति के लिहाज से अलग। अमूमन टेलीग्राफ की लीड …

आज तो दैनिक भास्कर बाजी मार ले गया !!

दैनिक भास्कर ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी को अवमानना के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से बरी किए जाने लेकिन कड़ी फटकार लगाने की खबर को आज चार कॉलम में लीड बनाया है। मैं लिखता रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी कई बड़ी खबरें आम तौर पर अखबारों में पहले पन्ने पर जगह पा …

विधानसभा भंग करने की खबर : नवभारत टाइम्स में सबसे लचर शीर्षक और डिसप्ले

पांच महीने से निलंबित अवस्था (ससपेंडेड एनिमेशन) में चल रही जम्मू कश्मीर विधानसभा को कल राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अचानक भंग कर दिया। दिन भर के घटनाक्रम से यह लगने लगा था कि भाजपा के समर्थन से सरकार चला चुकी महबूबा मुफ्ती पीडीपी-कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना सकती हैं तो 1980 के दशक में …

सुषमा के एलान ने चौंकाया पर खबर छोटी सी!!

मैं लिख चुका हूं कि सुप्रीम कोर्ट की खबर हमारे हमारे यहां अखबारों में लीड ही बनती है। इस लिहाज से सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने अपनी याचिका में जो आरोप लगाए वह मीडिया को नहीं दिए जाने चाहिए थे पर मिल गए तो ‘खबर’ पहले पेज की ही थी। और कल मैं …

ठीकरा डोभाल पर; पीएमओ, प्रधानमंत्री, गुजरात की भी कोई चर्चा नहीं

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच से हटाकर टांसफर किए गए डीआईजी मनीष सिन्हा के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने और उनके आरोपों को जानने के बाद ही मुझे लग गया था कि आज अखबार में देखने लायक खबर यही होनी है। मैं यह भी सोच रहा था कि दि टेलीग्राफ में इस …

वॉर्म का मतलब नीच / कमीना भी होता है, हिन्दी में ऐसा शीर्षक सुझाइए

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच से हटाकर टांसफर किए गए डीआईजी मनीष सिन्हा के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने और उनके आरोपों को जानने के बाद मैं इंतजार कर रहा था कि दि टेलीग्राफ में इस खबर का शीर्षक क्या होगा। खबर सात कॉलम में बैनर बनेगी यह अंदाजा तो था पर …

धार्मिक सत्संग पर हमले की खबर – देखें, अखबारों ने कैसे एक से लेकर सात कॉलम तक में परोसा

ऊपर प्रकाशित पीटीआई की खबर और शीर्षक का अनुवाद इस प्रकार होगा। पंजाब में विस्फोट से तीन मरे अमृतसर : शहर की सीमा पर इतवार को एक धार्मिक सत्संग के दौरान ग्रेनेड फटने से तीन लोगों की मौत हो गई और 20 जने जख्मी हो गए। पुलिस इसे “आंतकवादी कार्रवाई” मान रही है। पुलिस ने …

अंग्रेजी अखबारों में खबर वित्त मंत्रालय की है, वित्त मंत्री ही स्रोत हैं!

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के ‘पोस्टर ब्वाय’ हसमुख अधिया के लिए एक असामान्य और समयपूर्व विदाई संदेश लिखा आज टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पेज पर सिंगल कॉलम में टॉप पर छोटी सी खबर है, “अधिया ने महत्वपूर्ण पदों की पेशकश ठुकरा दी : वित्त मंत्री”। इस खबर में यह सूचना भी है …